'राहुल गांधी VVIP नहीं', मानहानि मामले में SC में दलील; CJI ने कहा- हमारे लिए सब बराबर
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के VVIP बर्ताव के आरोप पर टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमारे लिए सब बराबर
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी मानहानि मामले पर सुनवाई की।
शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी पर VVIP बर्ताव का आरोप लगाया।
CJI ने कहा, कोर्ट के लिए सभी व्यक्ति समान हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि मामले में सुनवाई की अपील को लेकर टिप्पणी की।
शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट रजिस्ट्री पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता के साथ 'VVIP' जैसा बर्ताव किया जा रहा है। वहीं कोर्ट ने कहा कि उनके लिए सब बराबर हैं।
'राहुल गांधी VVIP नहीं'
सुप्रीम कोर्ट में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने शिकायत की कि राहुल गांधी की अपील पर सुनवाई के लिए पहले न्यायिक निर्देश होने के बावजूद उसे लिस्ट नहीं किया गया था।
भाटिया ने कोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश का जिक्र करते हुए कहा, 'वह VVIP नहीं हैं। यह मामला पांच महीने पहले भी लिस्ट किया गया था और उस पर सुनवाई नहीं हुई थी। यह संस्था के लिए भी अच्छी बात नहीं है।' बता दें कि कोर्ट ने आदेश दिया था कि मामले को 22 अप्रैल को लिस्ट किया जाए।
कोर्ट के लिए सब बराबर
सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया की दलील पर बेंच ने उनसे जल्द सुनवाई के लिए अर्जी दाखिल करने को कहा। बेंच ने कहा, 'हमें प्रक्रिया का पालन करने दें। जल्द सुनवाई के लिए अर्जी दाखिल करें, हमारे लिए सब बराबर हैं। हम इस पर सुनवाई करेंगे।'
क्या है मामला?
राहुल गांधी ने दिसंबर 2022 में 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कहा था कि चीनी सैनिकों ने भारत के 2,000 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा कर लिया है।
यह मामला पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने आया था। बेंच ने 4 अगस्त 2025 को आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
बेंच ने राहुल गांधी से इस दावे का आधार पूछा था और कहा था कि सीमा विवाद से जुड़े ऐसे मुद्दों को संसद में उठाया जाना चाहिए।
गांधी ने कोर्ट से कहा था कि वह अभिव्यक्ति की आजादी के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे और जनता का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचना चाहते थे जिन्हें उनकी नजर में ठीक से नहीं उठाया जा रहा था।
शिकायतकर्ता श्रीवास्तव ने लखनऊ की एक अदालत में यह आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया कि गांधी की टिप्पणियों से भारतीय सेना की बदनामी हुई है। वे बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं और उनका दावा है कि यह पद सेना में कर्नल के पद के बराबर था। लखनऊ की अदालत ने कांग्रेस नेता को समन भेजा।
मई 2025 में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि श्रीवास्तव, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 199 के तहत एक पीड़ित व्यक्ति के तौर पर शिकायत कर सकते हैं।
इसके बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट गए। दिसंबर में, निर्देश दिया गया कि इस मामले को 'द वायर' से जुड़े मानहानि के एक अलग मामले के साथ 22 अप्रैल, 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए। हालांकि, इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी।
बुधवार की सुनवाई के दौरान, भाटिया ने तर्क दिया कि उनके मामले को गलत तरीके से 'द वायर' की याचिकाओं के साथ जोड़ा गया था और अदालत को उनके मामले को अलग करने (डी-टैगिंग) का आदेश देना चाहिए।
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