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‘राहुल माइनो नाम रखें और खत्म करें पितृसत्ता’, सुधांशु त्रिवेदी की राहुल गांधी को सीधी चुनौती

Published: Thu, 27 Aug 2026 08:36 PM (IST)

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को मनुस्मृति और पितृसत्ता पर घेरा, उन्हें 'राहुल माइनो' नाम रखने की चुनौती दी।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को 'राहुल माइनो' नाम रखने की चुनौती दी

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को 'राहुल माइनो' नाम रखने की चुनौती दी

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मनुस्मृति की मानसिकता में पितृसत्ता के प्रभाव का आरोप लगाने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने तथ्यों, तर्कों, आरोपों और सवालों के चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश की है।

सबसे बड़ा सवाल यह कि मनुस्मृति की मूल प्रति कहां है? उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि विदेशी मूल की मां का बेटा ब्रिटिश टेम्पलेट का उपयोग कर रहा है, जिसका उद्देश्य बांटो और राज करो नहीं, बल्कि बांटो और नष्ट करो है।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के पितृसत्ता आरोपों पर घेरा

पितृसत्ता खत्म करने के राहुल के दावे पर उन्होंने चुनौती दी- सोनिया गांधी क्यों अपने पति राजीव गांधी का सरनेम लगा रही हैं? क्यों नाम बदला है? असली नाम लिखें एंटोनिया माइनो और राहुल गांधी भी पितृसत्ता खत्म करते हुए पिता का नाम छोड़ें और माताजी का नाम लेकर कहें 'राहुल माइनो।'

दैनिक जागरण से बातचीत के क्रम में डा. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई कहे कि हिजाब, चार बीवी, तलाक-ए-बिद्दत, हलाला और मेहरम, ये पितृसत्ता नहीं है और यत्र नारी पूज्यंते... पितृसत्ता है। शिव-शक्ति की अवधारणा रखने वाली भारतीय संस्कृति पितृसत्तात्मक है।

मनुस्मृति पर राहुल से पूछा सवाल 

पत्नी को अद्धांगिनी कहना पितृसत्ता है तो देश का गंभीर व्यक्ति समझ सकता है कि इसके बाद भी कोई यदि हिंदू धर्म-संस्कृति को यह पढ़ाए तो वह मूर्ख है या धूर्त है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिसको राहुल गांधी मनुस्मृति कहते हैं, उसकी मूल प्रति कहां है? दावा किया कि कलकत्ता हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस रहा विलियम जोन्स 1783 में इंग्लैंड से आता है। एक साल में सारी संस्कृत सीखकर 1784 में मनुस्मृति का पूरा अनुवाद कर देता है।

जबकि महात्मा गांधी ने 4 मई 1928 को पीटी पिल्लई को लिखे पत्र में कहा था- मैं मनुस्मृति को बुरा नहीं मानता। इसमें बहुत सी बातें तारीफ के काबिल हैं। हालांकि, इसके मौजूदा स्वरूप में निस्संदेह कई बुरी बातें भी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि ये बाद में जोड़ी गई हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का किया जिक्र 

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मई 1955 में संसद में दो बयान दिए। कहा- 'इसमें कोई शक नहीं कि मनु और याज्ञवल्क्य महान आत्माएं हैं। उन्होंने जो कुछ भी लिखा है, उसे सम्मान के साथ पढ़ना और उस पर सोचना चाहिए।'

भाजपा सांसद ने यह भी दावा किया कि मनुस्मृति नाम से नौ-नौ टीकाकारों की टिप्पणियों सहित पुस्तक मनुस्मृति के नाम से 1972 में इंदिरा गांधी सरकार और 1985 में राजीव गांधी की सरकार के सहयोग से भारतीय विद्या भवन द्वारा प्रकाशित की गईं।

उन्होंने चुटकी ली कि राहुल गांधी अब अपने पिता, दादी, अपने पिता के नाना, डॉ. आंबेडकर और महात्मा गांधी तक सभी को गलत साबित कर रहे हैं। कांग्रेस को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि अल्ट्रा लेफ्ट ने राहुल गांधी के दिमाग को हैक कर लिया है।

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