यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
घर खरीदारों की चिंता होगी कम, सरकार उठाने जा रही ये कदम; एक जगह मिलेगी प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी
रियल इस्टेट रेगुलेटर अथॉरिटी के कामकाज को लेकर देश के कई राज्यों में हमेशा सवाल खड़े होते हैं। इस बीच सरकार के एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। घर खरीदारो ...और पढ़ें

HighLights
- घर खरीदारों की सुविधा और अधिक पारदर्शिता के लिए उठाया जा रहा कदम
- बिल्डरों के सभी प्रोजेक्टों की स्थिति की एक जगह मिलेगी जानकारी
मनीष तिवारी, नई दिल्ली। रेरा के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच आवास और शहरी कार्य मंत्रालय घर खरीदारों की सुविधा और उनकी चिंताओं का निराकरण करने के लिए पूरे देश में रेरा की एक जैसी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
माना जा रहा है कि यह कदम घर खरीदारों को बिल्डरों और डेवलपरों के कामकाज की बेहतर तस्वीर उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इसके जरिये वे सुगमता और सहजता से यह जान सकेंगे कि बिल्डरों-डेवलपरों के पूरे देश में प्रोजेक्टों की क्या स्थिति है, उनका रिकार्ड कैसा है और उनके खिलाफ कैसी और किस तरह की शिकायतें हैं।
पूरे देश में एक जैसी वेबसाइट बनाने की तैयारी
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अभी राज्यों में रियल इस्टेट रेगुलेटर अथॉरिटी यानी रेरा की अलग-अलग वेबसाइटें हैं। इनमें एकरूपता की जरूरत महसूस की जा रही है। गुजरात रेरा ने उल्लेखनीय काम है। इसके अनुरूप सभी रेरा की वेबसाइटों का मॉडल रूप बनाना अच्छा कदम होगा।
सभी प्रोजेक्टों का रेरा में पंजीकरण अनिवार्य
उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में रेरा की वेबसाइट में उन्हीं बिल्डरों के प्रोजेक्टों का विवरण होगा, जो उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह संभव है कि उन्हीं बिल्डरों के प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में चल रहे हों जिनकी स्थिति अलग हो। रेरा के कानून के तहत सभी प्रोजेक्टों का रेरा में पंजीकरण अनिवार्य है। रेरा उनकी प्रगति की छानबीन भी करता रहता है। इनसे संबंधित डाटा को आपस में जोड़ने से लोगों के लिए अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
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घर खरीदारों के संगठन फोरम फार पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट (एफपीसीई) के प्रमुख और रेरा की केंद्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य अभय उपाध्याय ने कहा कि यह पहल समय की मांग है। बिल्डरों और डेवलपरों के सभी प्रोजेक्टों की जानकारी सभी को मिलनी चाहिए। इसमें जितनी अधिक पारदर्शिता होगी, उतना ही सामान्य लोगों के लिए अच्छा होगा।