मनमाने हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मनमाने हवाई किराए पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के मसौदा नियमों को एक सप्ताह में अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

मनमाने हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यात्री विमान किराए में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के मसौदा नियमों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने जवाब के लिए मांगा समय
सरकार ने कहा कि इन नियमों का मकसद भारतीय विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना और यात्रियों के हितों की रक्षा करना है। केंद्र ने नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक सप्ताह में पूरा करने को कहा।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि नियमों का पालन नहीं करने वाली एयरलाइंस के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सीलबंद लिफाफे में पेश किया मसौदा
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ के सामने केंद्र ने मसौदा नियम सीलबंद लिफाफे में पेश किए। अतिरिक्त सालिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि नियमों पर अंतिम चर्चा चल रही है और सरकार तीन सप्ताह के भीतर इन्हें अंतिम रूप दे देगी।
हालांकि, पीठ ने मामले को जल्द निपटाने पर जोर दिया और अगली सुनवाई सात सितंबर को तय की।
जनहित याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका से जुड़ा है। उन्होंने नागरिक विमानन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की है, जो हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क में होने वाले अनिश्चित उतार-चढ़ाव पर नजर रख सके।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नए नियम लागू होने तक मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों की इच्छाशक्ति और मौजूदा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एयरलाइंस यात्रियों से बहुत अधिक किराया वसूल रही हैं।
उन्होंने संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकार हवाई किराए की कोई सीमा तय नहीं कर सकती।
पीठ ने सीलबंद लिफाफे में पेश मसौदे को देखने के बाद कहा कि इसमें एक तंत्र का सुझाव दिया गया है, लेकिन प्रस्तावित नियामक व्यवस्था को लेकर अदालत पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। अदालत ने केंद्र को नियमों को जल्द अंतिम रूप देने का निर्देश दिया।
(न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट की तरह)
