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135 साल पुराने CSL पुस्तकालय मामले में SC का स्वत: संज्ञान, आज होगी सुनवाई

Published: Mon, 05 Oct 2026 05:21 AM (IST)Updated: Mon, 05 Oct 2026 07:12 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को शास्त्री भवन से स्थानांतरित करने के प्रस्तावित मामले पर ...और पढ़ें

CSL पुस्तकालय मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

 CSL पुस्तकालय मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय स्थानांतरण पर स्वतः संज्ञान लिया।

  2. पुस्तकालय को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत ध्वस्त किया जाना है।

  3. संस्कृति मंत्रालय ने अपर्याप्त स्थान आवंटन पर चिंता जताई।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली के शास्त्री भवन से 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को स्थानांतरित करने के प्रस्तावित मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है।

इस पुस्तकालय को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत ध्वस्त किया जाना है। न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार व न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ सोमवार पांच अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय की स्थापना 1891 में कलकत्ता में इंपीरियल सेक्रेटेरिएल लाइब्रेरी के रूप में हुई थी। सीएसएल को 1911 में राजधानी स्थानांतरित होने के बाद दिल्ली लाया गया था और 1969 से यह शास्त्री भवन में स्थित है।

यह कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय है। वर्तमान में यह पुस्तकालय चार मंजिलों में लगभग 5500 मीटर वर्गक्षेत्र में फैला हुआ है। और इसमें दुर्लभ पुस्तकों , सरकारी प्रकाशनों, आधिकारिक अभिलेखों और राजपत्रों सहित 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों का संग्रह है।

संस्कृति मंत्रालय ने शुरुआत में पुनर्विकसित केंद्रीय सचिवालय में पुस्तकालय के लिए लगभग 5466 वर्ग मीटर जगह की मांग की थी। लेकिन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत संपदा निदेशालय द्वारा कर्तव्य भवन-2 में केवल 300 वर्ग मीटर के दो कमरे पुस्तकालय के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव रखे जाने के बाद इसके भविष्य को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गईं।

संस्कृति मंत्रालय ने फरवरी में सूचित किया कि प्रस्तावित स्थान पुस्तकालय के संपूर्ण संग्रह और सुविधाओं को रखने के लिए अपर्याप्त था और आवंटित स्थान पर पूर्ण स्थानांतरण संभव नहीं था। इस पुस्तकालय में न केवल दुर्लभ किताबों का संग्रह मौजूद है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक देश की प्रगति और समकालीन ऐतिहासिक घटनाक्रमों का दस्तावेज भी यहां है।