'किराया भरना है...', शहजाद पूनावाला ने बताई BJP से इस्तीफा देने की वजह; कांग्रेस में शामिल होने के लिए रखी शर्त
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

अपने इस्तीफे पर क्या बोले शहजाद पूनावाला? (फाइल फोटो)
HighLights
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से इस्तीफा दिया, आर्थिक कारण बताए।
प्रवक्ताओं को वेतन न मिलने से गुजारा मुश्किल हो रहा था।
पीएम मोदी के विजन और पार्टी की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। टीवी डिबेट में सत्ताधारी पार्टी के सबसे जाने-माने चेहरों में से एक पूनावाला ने कहा कि उन्होंने जरूरी आर्थिक और निजी हालात की वजह से यह फैसला लिया है।
बीजेपी छोड़ने के बाद पूनावाला ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजेपी समेत राजनीतिक पार्टियां अपने प्रवक्ताओं को सैलरी नहीं देती हैं और उन्हें अपना गुजारा करने में मुश्किल हो रही थी। शहजाद पूनावाला ने कहा, "मुझे किराया देना है। मेरा मकान मालिक मुझे मुफ्त में घर नहीं देगा क्योंकि मैं बीजेपी से हूं। वह 1 तारीख को किराया मांगता है। राजनीतिक पार्टियां कार्यकर्ताओं को पैसे नहीं देती हैं।"
'पीएम मोदी के विजन के प्रति प्रतिबद्ध, गुजारे की उम्मीद नहीं'
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बीजेपी से गुजारे की उम्मीद नहीं थी और वह अब भी पार्टी और प्रधानमंत्री के विजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। पूनावाला ने कहा, "बीजेपी का काम मेरा या किसी और कार्यकर्ता का गुजारा करना नहीं है। देखिए, जब आप किसी राजनीतिक आंदोलन से जुड़ते हैं तो यह कोई नौकरी नहीं होती। आप विचारधारा, किसी व्यक्ति या संगठन के प्रति लगाव की वजह से कार्यकर्ता बनते हैं। ये तीनों चीजें अब भी मेरे साथ हैं।"
'मैं लेता या बेटा वाली कैटगरी में नहीं आता'
कांग्रेस छोड़ने के बाद 2021 में बीजेपी में शामिल हुए शहजाद पूनावाला ने जोर देकर कहा कि पार्टी से उनके अचानक बाहर निकलने की मुख्य वजह आर्थिक कारण थे। उन्होंने बताया कि ज्यादातर नेता या तो 'लेता' (फायदा लेने वाले) या 'बेटा' (किसी का बेटा) वाली श्रेणी में आते हैं लेकिन वह इनमें से किसी में भी नहीं आते थे और इसलिए उन्हें अपना गुजारा करने के लिए रास्ते खोजने की जरूरत थी।
उन्होंने आगे कहा, "लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मुझ जैसे राजनेता (पहली पीढ़ी के, नए जमाने के राजनेता) किसी राजनीतिक विरासत से नहीं आते। असल में हम सचिन पायलट या ऐसे ही नेताओं और उनके बेटों को देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि हमें लगता है कि हर किसी की जीवनशैली वैसी ही होती है।"
'पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर करने पर लीडरशिप ने किया संपर्क'
पूनावाला ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि वह 2024 से ही इस बारे में सोच रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि जब कुछ हफ्ते पहले उन्होंने पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी तो पार्टी लीडरशिप ने उनसे संपर्क किया था।
उन्होंने कहा, "जिन्हें भी मुझसे संपर्क करना था उन्होंने 30 जुलाई को ही मुझसे संपर्क कर लिया था और उससे भी पहले जब मैंने उन्हें अपनी चुनौतियों के बारे में बताया तो उन्होंने सचमुच मेरी मदद करने और यह देखने के लिए बहुत कोशिश की कि मेरा ध्यान कैसे रखा जा सकता है लेकिन सच कहूं तो मेरा जमीर मुझे इसकी इजाजत नहीं देता।"
उन्होंने आगे कहा, "बीजेपी मेरे लिए नौकरी का जरिया नहीं है। बीजेपी मेरे लिए विचारधारा से जुड़ने का मौका है और इसकी विचारधारा या मोदी जी के विजन के प्रति समर्पित होने के लिए मुझे पार्टी में किसी पद पर रहने की जरूरत नहीं है।"
इस्तीफे को लेकर चल रही थ्योरीज को लेकर क्या बोले पूनावाला?
अपने इस्तीफे को लेकर चल रही अलग-अलग साजिश की थ्योरीज (जैसे कि कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो) को खारिज करते हुए पूनावाला ने कहा कि उन्होंने ऐसे किसी वीडियो के बारे में पहली बार सुना है और सोशल मीडिया पर चल रही कहानियों में कोई सच्चाई नहीं है।
अपने इस्तीफे के पत्र में शहजाद पूनावाला ने कुछ लोगों की वजह से पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं का जिक्र किया लेकिन किसी का नाम नहीं लिया और न ही कोई ब्योरा दिया। इसको लेकर उनका कहना है, "किसी भी संगठन में और खासकर राजनीतिक या मीडिया संगठनों में अगर आपको लगता है कि सबके रिश्ते बहुत अच्छे और सब कुछ ठीक-ठाक रहेगा तो असल में ऐसा नहीं होता है।"
इसके बाद उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें गिरते हुए देखना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने किसी खास व्यक्ति या नाम का जिक्र नहीं किया। उन्होंने बस इतना ही कहा, "पब्लिक लाइफ ऐसी ही होती है... लोग आपको नीचे गिराना चाहते हैं।"
कांग्रेस में शामिल होने के लिए रखी एक शर्त
कांग्रेस में वापस लौटने की संभावना को खारिज करते हुए शहजाद पूनावाला ने अपनी सोच बदलने के लिए शर्तें बताईं। पूनवाला ने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं एक शर्त पर कांग्रेस में शामिल होऊंगा: राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा को हटाओ और नेहरू के कामों के लिए माफी मांगो।"
शहजाद पूनावाला ने कहा कि वे वैचारिक रूप से पीएम मोदी के विजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, "मैं राहुल गांधी की तरह भविष्यवक्ता नहीं हूं लेकिन अभी मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि पीएम मोदी से बड़ा नेता इस देश में न तो कोई हुआ है और न ही कोई होगा और दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करने के बाद क्या आपको लगता है कि मैं किसी दूसरी पार्टी से जुड़ूंगा? इस समय भारत में बीजेपी ही सबसे अच्छी पार्टी है।"
