विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी को बरी किया, जेल से तत्काल रिहाई के आदेश; अधूरी जांच पर सवाल

Published: Thu, 03 Sep 2026 02:56 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक नाबालिग बच्चे के कथित यौन उत्पीड़न और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी को बरी किया (फोटो- एएनआई)

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी को बरी किया (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. अदालत ने कहा, अभियोजन के मामले में कई कड़ियां गायब हैं

  2. इस मामले में आरोपित काट चुका है 16 साल जेल की सजा

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक नाबालिग बच्चे के कथित यौन उत्पीड़न और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन के मामले में कई कड़ियां गायब हैं। इस मामले में यह व्यक्ति 16 साल और सात महीने जेल की सजा काट चुका है।

जस्टिस संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा सुनाने में गलती की थी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा को बरकरार रखकर गलती की थी। अपराध का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था।

आरोपित के खिलाफ पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और "आखिरी बार एक साथ देखे जाने" के सिद्धांत पर आधारित था। आरोपित द्वारा गांव के सरपंच के सामने कथित तौर पर किए गए 'एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन' (न्यायालय के बाहर की गई स्वीकारोक्ति) का कोई विश्वसनीय आधार नहीं था।

सरपंच के साथ न तो आरोपित का और न ही पीड़ित का कोई संबंध था। न्यायालय के बाहर की गई स्वीकारोक्ति एक कमजोर साक्ष्य है। यह अपने आप में किसी स्वतंत्र और ठोस सहायक साक्ष्य के बिना दोषसिद्धि का एकमात्र आधार नहीं बन सकता।

यह है मामला
2007 में अंबाला में दर्ज मामले के लिए ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को नाबालिग लड़के की हत्या और अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न सहित अन्य अपराध का दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपित को आखिरी बार पीड़ित के साथ देखा गया था।

आरोप लगाया गया कि उसने नाबालिग का अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और शव को कुएं में फेंक दिया। पीड़ित 11 मार्च, 2007 को गायब हुआ था और उसका शव अगले सुबह मिला था।

अभियोजन के अनुसार, मृतक की चप्पलें और नमकीन का खुला पैकेट घटनास्थल से जब्त किया गया था। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई वाजिब कारण समझ नहीं आता कि घटनास्थल पर मिले नमकीन के पैकेट को क्यों जब्त किया गया। चूंकि ऐसे पैकेट रोजाना बिकते हैं, इसलिए नमकीन के खुले पैकेट में ऐसी क्या संदिग्ध बात थी कि पुलिस ने उसे जब्त कर लिया?

सुप्रीम कोर्ट में नीट-पीजी परीक्षा पुनः कराने के खिलाफ याचिका

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिका में 2,445 छात्रों के लिए नीट-पीजी की पुनः परीक्षा कराने के फैसले को चुनौती दी गई, जो परीक्षा देने में असमर्थ रहे थे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और वी.मोहन की पीठ को एक वकील ने बताया कि पुनः परीक्षा शीर्ष अदालत द्वारा पारित एक पूर्व आदेश का उल्लंघन है। उन्होंने मामले की तात्कालिक सुनवाई की मांग की।

शीर्ष अदालत ने कहा,"सभी नीट मामले न्यायाधीश नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली निर्धारित पीठ के समक्ष हैं। जाइए और इसे उस पीठ के समक्ष प्रस्तुत कीजिए। इन मामलों में कई विकास होते है।"

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड 2,445 उम्मीदवारों के लिए तकनीकी बाधा से प्रभावित नीट-पीजी 2026 पुनः परीक्षा आयोजित करेगा। नीट-पीजी 2026 परीक्षा 30 अगस्त को देशभर में आयोजित की गई थी। कुल 2,65,980 उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया, जिसमें से 2,63,535 उम्मीदवारों के लिए परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी।