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महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली के संवेदनशील इलाकों का होगा सुरक्षा ऑडिट

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:14 PM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 04:08 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर चिंता जताते हुए पुलिस को व्यापक निर्देश दिए हैं। इनमें चार सप्ताह ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की

  2. पुलिस को चार सप्ताह में संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने का निर्देश

  3. गश्त बढ़ाने, खराब स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी ठीक करने के आदेश

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में पिछले दिनों घटी दुष्कर्म की घटनाओं और महिला सुरक्षा पर चिंता जताते हुए मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल चिंता जताते तक सीमित रहने के बजाए जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जाने चाहिए।

इसी को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किये हैं। कोर्ट ने पुलिस को चार सप्ताह के भीतर संवेदनशील इलाकों का सर्वे कराने, ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों का नक्शा तैयार करने, पुलिस गश्त बढ़ाने और खराब स्ट्रीट लाइट व सीसीटीवी को दुरुस्त करने के आदेश दिये हैं।

न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ उपाय तत्काल अंतरिम तौर पर चार सप्ताह में करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त प्रत्येक पुलिस जिले के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन करेंगे। इन टीमों का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक से नीचे रैंक का अधिकारी नहीं करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा पर जताई चिंता

ये टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों का तत्काल सर्वेक्षण और निरीक्षण केरेंगी। इसमें बाहरी इलाके, सुनसान क्षेत्र, पार्क, परिवहन केंद्र, बाजार, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के क्षेत्र और अन्य सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।

यह आडिट एनसीआरबी के आंकड़ों, स्थानीय खुफिया जानकारी, अतीत और वर्तमान में मिली शिकायतों , पिछली घटनाओं और अन्य संकेतों के आधार पर किया जाएगा, ताकि ऐसे स्थानों की पहचान की जा सके, जहां खराब रोशनी, निगरानी की कमी, अपर्याप्त गश्त, खाली या परित्यक्त ढांचे, प्रवेश नियंत्रण की कमी या अन्य कमियों से अपराध का खतरा बढ़ सकता है।

कोर्ट ने कहा है कि जिलेवार संवेदनशीलता का नक्शा तैयार किया जाएगा और उसे आसपास के पुलिस थानों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि अपराध के बार-बार सामने आने वाले पैटर्न और आदतन अपराधियों से संबंधित जानकारी किसी एक पुलिस थाने के क्षेत्र तक सीमित न रहे। चिन्हित सभी सार्वजनिक पार्कों और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था हर समय होगी।

विशेष रूप से शाम सुबह के शुरुआती घंटों में और या संवेदनशीलता के आंकलन के आधार पर सामने आने वाले अन्य समय में। प्रत्येक ऐसे स्थान के लिए एक जिम्मेदारी अधिकारी नियुक्ति किया जाएगा और समय समय पर निरीक्षण की व्यवस्था तय की जाएगी।

गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी ठीक करने के आदेश

कोर्ट ने कहा है कि सभी सार्वजनिक पार्कों और संवेदनशील क्षेत्रों में तुरंत रोशनी और सीसीटीवी का आडिट का किया जाएगा, ताकि अंधेरे या निगरानी से बाहर वाले स्थान खत्म किये जा सकें।

जहां रोशनी नहीं है या सीसीटीवी नहीं हैं उन्हें ठीक किया जाएगा। जहां नागरिकों ने शिकायत की है वहां अतिरिक्त लाइट और सीसीटीवी लगाए जाएंगे।

कोर्ट ने कहा है कि मैट्रो स्टेशन, बस स्टाप, रेलवे स्टेशनों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक परिवहन सुविधाओँमें भी इसी तरह का आडिट किया जाएगा, खासकर उन स्थानों पर जो चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों के भीतर या उनसे लगे हुए हैं।

पीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ढांचे की कमियों की पहचान करने के लिए मौजूदा नागरिक शिकायत निवारण व्यवस्था, जिसमें मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल भी शामिल है, का अतिरिक्त स्रोत के रूप में इस्तेमाल करेंगे।

टिंटेड शीशो पर भी सख्ती : SC

कोर्ट ने टिंटेड शीशो पर भी सख्ती करने के आदेश दिये हैं। पुलिस को मोबाइल चेकपोस्ट और नियमित वाहन जांच बढ़ाने तथा वाहनों के काले टिंटेड या सोलर कंट्रोल फिल्म वाले शीशों के खिलाफ पहले दिये गए निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। अनुपालन न करने वाले वाहनों को जब्त करने, अवैध फिल्म हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

इसके अलावा दिल्ली हाई कोर्ट को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और विशेष पोक्सो अदालतों की संख्या लंबित मामलों और पिछले तीन वर्षों मे केस निपटान दर की जानकारी मांगी है।

कोर्ट ने ऐसे मामलों की सुनवाई ट्रायल शुरू होने के एक वर्ष के भीतर पूरी करने का प्रयास करने को कहा गया है। कोर्ट ने मीडिया से भी ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में संवेदनशील और जिम्मेदार आचरण करने को कहा है।