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'बच्चे के अधिकार सर्वोपरि', सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा तुरंत सौंपने दिया आदेश

Published: Sat, 19 Sep 2026 02:10 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक नाबालिग की कस्टडी पर तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश रद कर दिया और हैदराबाद ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा तुरंत सौंपने दिया आदेश (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा तुरंत सौंपने दिया आदेश (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक देरी और तकनीकी अड़चनों को किया खारिज

  2. सुप्रीम कोर्ट ने दिया गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा सौंपने का आदेश

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक नाबालिग की कस्टडी पर तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश रद कर दिया और हैदराबाद की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को बच्चा उसे गोद लेने वाले माता-पिता होने का दावा करने वाले पति-पत्नी को सौंपने का निर्देश दिया।

जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने यह आदेश तेलंगाना हाई कोर्ट के 12 जून, 2025 के आदेश के विरुद्ध मोहम्मद अकबर और अन्य की अपील को स्वीकार करते हुए दिया।

यह मामला तब सामने आया जब बच्चे को इस शक के आधार पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने कस्टडी में ले लिया था कि उसकी जैविक मां ने उसे पहले दो अपीलकर्ता को बेच दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चे को उसकी जैविक मां ने इसलिए गोद दिया था क्योंकि वह पैसे की तंगी की वजह से उसकी देखभाल नहीं कर पा रही थी।

इससे यह अपने आप नहीं माना जा सकता कि बच्चे को बेचा गया था। साथ ही यह ऐसा मामला नहीं है जहां पहले दो अपीलकर्ताओं ने बच्चे की ठीक से देखभाल नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट ने को-लोकेशन, डार्क फाइबर मामलों में एनएसई-सेबी को दी समझौते की इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (सेबी) और नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के बीच लंबे समय से चल रहे को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में समझौते की इजाजत दे दी। इससे इन मामलों से जुड़ी नियामक कार्यवाही खत्म हो गई।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने समझौते की इजाजत दी और दोनों मामलों से जुड़ी लंबित कार्यवाही का निपटारा कर दिया।

इस समझौते में सेबी की समाधान व्यवस्था के तहत एनएसई द्वारा कुल 1,491.21 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है। इस रकम में को-लोकेशन मामले के लिए 1,223.56 करोड़ रुपये और डार्क फाइबर मामले के लिए 267.65 करोड़ रुपये शामिल हैं।

एनएसई ने पहले ही सेबी के पास Rs 776.47 करोड़ जमा कर दिए थे और सेबी के समझौता प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद Rs 714.74 करोड़ और दिए। इससे 1,491.21 करोड़ का समझौता पूर्ण हो गया।

ये मामले उन आरोपों से जुड़े हैं जिनसे पता चला है कि कुछ ब्रोकर्स ने एनएसई के को-लोकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेडिंग डाटा को एक्सेस किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में चार लोगों की सजा और उम्रकैद को किया रद

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 25 साल पुराने हत्या के मामले में चार लोगों को सुनाई गई सजा और उम्रकैद को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड में मौजूद सुबूतों में "बड़ी कमियां" हैं, जिससे अपराध में उनकी भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने उन अपीलों पर अपना निर्णय सुनाया जिनमें ओडिशा हाई कोर्ट के मई 2009 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी। इस मामले में छह लोगों की सजा को बरकरार रखा गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सजा पाए छह लोगों ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। कोर्ट ने गौर किया कि अपील लंबित रहने के दौरान उनमें से दो की मौत हो गई और नतीजतन उनके मामले में अपील समाप्त हो गई।

बेंच ने कहा कि हालांकि मेडिकल सुबूतों से यह स्पष्ट रूप से साबित हुआ कि मृतक की मौत हत्या के कारण हुई थी, लेकिन हमारे सामने सवाल यह है कि क्या अभियोजन पक्ष अपीलकर्ताओं द्वारा अपराध किए जाने को साबित करने में सफल रहा। हमने पाया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में नाकाम रहा।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला मुख्य रूप से कुछ कथित चश्मदीदों के बयानों पर आधारित था। मई 2001 में एक एफआइआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपितों ने एक व्यक्ति पर हमला किया था और चोट के कारण उसकी मौत हो गई थी।