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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल: तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत शुरू, पहले दिन 400 मामले निपटाए

Updated: Sat, 22 Aug 2026 02:00 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने 'समाधान समारोह' पहल के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के पहले दिन शुक्रवार को 400 से अधिक मामलों का निपटारा किया। इस पहल का उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना है।

सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत ने पहले दिन 400 मामले निपटाए (फोटो- एएनआई)

सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत ने पहले दिन 400 मामले निपटाए (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. 16 विशेष लोक अदालत पीठों के समक्ष 600 से अधिक मामले रखे गए

  2. हर पीठ में सुप्रीम कोर्ट के दो जज, वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 'समाधान समारोह' पहल के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के पहले दिन शुक्रवार को 400 से अधिक मामलों का निपटारा किया। इस पहल का उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना है।

16 विशेष लोक अदालत पीठों के समक्ष 600 से अधिक मामले रखे गए। हर पीठ में सुप्रीम कोर्ट के दो जज, वरिष्ठ अधिवक्ता, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और दूसरे वकील शामिल थे।

शुक्रवार को जिन मामलों की सुनवाई की गई, उनमें विवाह और संपत्ति से जुड़े विवाद, वाहन दुर्घटना के दावे, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के मामले, टैक्स से जुड़े विवाद और सुप्रीम कोर्ट में लंबित सेवा और श्रम से जुड़े मामले शामिल थे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल में एक पूर्व-समझौता प्रक्रिया शामिल है। इसमें विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना तलाशने के लिए वादियों और उनके वकीलों को शामिल किया जाता है।

न्याय व्यवस्था पक्षों के बीच हिसाब-किताब बराबर करने का माध्यम नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील और उसकी पूर्व मुवक्किल के आचरण की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने अपनी प्रतिष्ठा के लिए न्यायपालिका का 11 वर्ष से ज्यादा का समय बर्बाद कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था पक्षकारों के लिए ऐसा साधन नहीं है, जिसका इस्तेमाल वे आपसी हिसाब-किताब बराबर करने के लिए करें।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों ने जानकारी छिपाई और कोर्ट के समक्ष पूरी ईमानदारी के साथ पेश नहीं हुए।

पीठ ने कहा, "इनमें से हर पक्ष हमारे समक्ष किसी गलत काम की शिकायत लेकर आया और प्रत्येक ने इसको खुद गढ़ा। इन लोगों ने मिलकर 11 साल तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया, एक हाई कोर्ट और इस अदालत का समय लिया। यह समय उन अन्य मुकदमों से जुड़े लोगों के लिए था, जो वास्तव में राहत का इंतजार कर रहे हैं। हम दोनों के आचरण की कड़ी निंदा करते हैं।" यह मामला मुंबई की एक महिला और वकील से जुड़ा है।