अहमदाबाद बम धमाके के दोषी की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, गुजरात सरकार को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में आतंकी संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' के एक आपरेटिव ...और पढ़ें

अहमदाबाद बम धमाके के दोषी की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक (फोटो- एएनआई)
HighLights
इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य अहमद बावा उर्फ अबू बकर बरेलवी की अर्जी पर गुजरात सरकार को जारी किया नोटिस
अहमद ने हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती, जिसने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को रखा था बरकरार
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के भीतर हुए 21 सीरियल बम धमाकों में 56 निर्दोष लोगों की मौत हुई
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में आतंकी संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' के एक ऑपरेटिव की मौत की सजा के अमल पर रोक लगा दी है।
इस सिलसिले में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दोषी अहमद बावा उर्फ अबू बकर बरेलवी की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े ट्रायल कोर्ट के रिकार्ड भी तलब किए हैं। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि यह एक बेहद गंभीर मामला है।
इससे पहले, सात जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 'इंडियन मुजाहिदीन' के 38 सदस्यों की मौत की सजा को बरकरार रखा था।
हाईकोर्ट ने भारी हताहतों, गंभीर साजिश और व्यापक आतंक फैलाने के इरादे को सजा कायम रखने का मुख्य आधार बनाया था।
साथ ही, कोर्ट ने 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को भी सही ठहराया था, जिनकी संलिप्तता गुजरात और केरलम के टेरर ट्रेनिंग कैंपों तथा रसद सहायता में साबित हुई थी।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिर्फ 70 मिनट के अंतराल पर 21 बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
इतिहास में यह पहली बार था जब भारत में किसी आतंकी हमले के दौरान अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया, जहां घायलों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था। विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 38 लोगों को मौत और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने मुहर लगाई थी।
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि इन धमाकों को जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया, वह दोषियों की निर्दयी मानसिकता को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अपराधियों के आपराधिक इतिहास रहे हैं और उन्होंने कोई पछतावा नहीं दिखाया।
इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा 30 मार्च 2027 से पहले दे। इस पूरे मामले में सफदर नागोर सहित कई राज्यों के आरोपित शामिल थे।
