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'समाधान समारोह' से मिला त्वरित न्याय, सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत ने सुलझाए वर्षों पुराने विवाद

Published: Wed, 26 Aug 2026 10:07 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट में 'समाधान समारोह 2026' के तहत आयोजित विशेष लोक अदालत ने 1,712 लंबित मामलों का निपटारा किया, जिनमें दशकों पुराने विवाद भी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट के 'समाधान समारोह' ने दशकों पुराने विवाद सुलझे

सुप्रीम कोर्ट के 'समाधान समारोह' ने दशकों पुराने विवाद सुलझे

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट में विशेष लोक अदालत ने 1,712 मामले निपटाए।

  2. 'समाधान समारोह' ने दशकों पुराने लंबित विवादों का समाधान किया।

  3. इस पहल से 240.94 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई।

पीटीआई, नई दिल्ली। भारतीय न्याय व्यवस्था में सुलभ और त्वरित न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट में 'समाधान समारोह 2026' के तहत 21 से 23 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत ने वर्षों से लंबित मामलों के समाधान की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

इस पहल के माध्यम से उन मामलों का भी सौहार्दपूर्ण अंत हुआ, जो कई दशकों से अदालत की फाइलों में उलझे हुए थे।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में 96 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से 10 हजार से ज्यादा मामले एक दशक से अधिक समय से फैसले की बाट जोह रहे थे।

ऐसे में इस विशेष लोक अदालत ने कुल 3,285 सूचीबद्ध मामलों में से 1,712 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया, जिसमें 48 मामले मध्यस्थता के जरिये सुलझाए गए। इस दौरान कुल 240.94 करोड़ रुपये की राशि भी वितरित की गई।

इस महा-अभियान में कई ऐसे मामले सुलझे जो न्याय की लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया का प्रतीक बन चुके थे। ऐसा ही एक मामला 1978 का एक व्यावसायिक विवाद था, जो सऊदी अरब की कंपनी 'अल मुस्तानीर एस्टेब्लिशमेंट फार ट्रेड' और सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के बीच लगभग 6.8 लाख डालर कीमत के दो हजार मीट्रिक टन एम.एस. राउंड बार्स की आपूर्ति के आर्डर से जुड़ा था।

दिल्ली हाईकोर्ट से होता हुआ यह मामला 2017 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसे इस लोक अदालत में आपसी बातचीत के जरिये हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। इसके अलावा, जयपुर की एक दुकान से जुड़ा 47 साल पुराना किरायेदारी विवाद भी डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथारिटी (डीएलएसए) जयपुर के सहयोग से सुलझ गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की पहल से मुकदमेबाजी का समय और खर्च दोनों बचते हैं, साथ ही वादियों को त्वरित न्याय की निश्चितता मिलती है।

लोक अदालत पीठों की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) ने की और इनमें अन्य वरिष्ठ जज और वरिष्ठ वकील शामिल थे, जिनकी सहायता सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के वरिष्ठ रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी कर रहे थे।

इन पीठों ने संवाद और सहमति के जरिये न्याय का एक नया और मानवीय चेहरा प्रस्तुत किया है।