'मुझे अफसोस है', थलपति विजय-तृषा विवाद पर तमिलनाडु बीजेपी चीफ ने मांगी माफी
तमिलनाडु बीजेपी चीफ नयनार नागेंद्रन ने एक्टर त्रिशा कृष्णन और विजय पर दिए अपने बयान के लिए माफी मांगी है। ...और पढ़ें

बीजेपी चीफ नयनार नागेंद्रन ने अपने बयान पर माफी मांगी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु बीजेपी चीफ, नयनार नागेंद्रन को तमिल एक्टर त्रिशा कृष्णन और एक्टर-पॉलिटिशियन विजय के बारे में बेतुका बयान देने के बाद माफी मांगनी पड़ी।
नागेंद्रन ने सोमवार शाम मीडिया से कहा, 'अपने पॉलिटिकल करियर में मैं किसी भी पर्सनल कमेंट की इजाजत नहीं देता... और न ही मैं कोई कमेंट करता हूं। लेकिन उस दिन मैंने यह नियम तोड़ा।' उन्होंने कहा, 'मैंने जो कहा, उसका मुझे अफसोस है।'
उन्होंने कहा कि BJP के कोयंबटूर (साउथ) MLA वनथी श्रीनिवासन और उनके पहले के MLA के अन्नामलाई ने उनसे इस विवाद पर बात की थी। उन्होंने कहा, 'के अन्नामलाई ने भी मुझे समझाया। मुझे अपने शब्दों पर अफसोस है और मैं माफी मांगता हूं।'
बयान में क्या है?
अपने एक बयान में विजय पर निशाना साधते हुए तमिलनाडु बीजेपी चीफ ने कहा था, 'मुझे उन पर दया आती है। उन्हें अनुभव नहीं है। उन्हें पहले त्रिशा के घर से बाहर आना चाहिए। उनके परिवार के साथ अच्छे रिश्ते होने चाहिए।' बता दें विजय और त्रिशा ने कई फिल्मों में साथ काम किया है।
तमिलनाडु बीजेपी चीफ के इस बयान के वायरल होने पर तृषा कृष्णन का भी पोस्ट सामने आया था। उनका नाम बेवजह घसीटने पर उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘Disrespect should and always will be called out’ यानी, ‘अपमान को हमेशा उजागर किया जाएगा।’
तृषा ने दिया था जवाब
इस पूरे विवाद के बीच त्रिशा कृष्णन के वकील नित्येश नटराज की तरफ से जारी सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किए गये पोस्ट में कहा गया, 'मेरे क्लाइंट ने कभी उम्मीद नहीं की थी कि राज्य की पॉलिटिकल दुनिया में ऊंचे ओहदे पर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी गलत बात कही जाएगी।
मेरे क्लाइंट ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ी नहीं हैं और न ही उनका ऐसा करने का कोई इरादा है। इसके अलावा, जैसा कि मेरे क्लाइंट ने पहले भी कहा है, उन्होंने पॉलिटिक्स के मामले में हमेशा न्यूट्रल स्टैंड लिया है।'
इस बयान में आगे कहा गया, 'मेरी क्लाइंट सिर्फ अपने काम से पहचानी जाना चाहती हैं, किसी कहे जा रहे पॉलिटिकल तालमेल से नहीं। सबसे जरूरी बात, यह आम कहावत है कि पर्सनल जिंदगी को कभी भी पब्लिक कमेंट्री या बातचीत का विषय नहीं बनाना चाहिए,
और उम्मीद की जाती है कि ऊंचे पदों पर बैठे लोग पब्लिक बातचीत में जिम्मेदारी और शांति बनाए रखें। रिक्वेस्ट है कि मेरी क्लाइंट का नाम उन मामलों में न घसीटा जाए जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।'
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