त्विषा शर्मा मौत मामला: गिरिबाला को बड़ा झटका, तीन अदालतों के चक्कर काटने के बाद जमानत अर्जी खारिज
मॉडल व एक्टर त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बहुचर्चित मामले में आरोपित सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी।

त्विषा शर्मा मौत : सेवानिवृत्त जिला जज की नियमित जमानत अर्जी खारिज (फाइल फोटो)
HighLights
तीन अदालतों में स्थानांतरण के बाद सीबीआई की विशेष अदालत में हुई सुनवाई
न्यायालय ने माना- जमानत मिली तो गवाहों व साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका
जेएनएन, भोपाल। मॉडल व एक्टर त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बहुचर्चित मामले में आरोपित सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी।
अपने आदेश में विशेष अदालत ने कहा कि विवेचना के दौरान एकत्र काल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), वाट्सअप चैट, अन्य दस्तावेजी साक्ष्य व गवाहों के बयान प्रथमदृष्टया आरोपित की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
साथ ही माना कि गिरिबाला के प्रभावशाली पद और सामाजिक हैसियत को देखते हुए रिहाई की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने तथा न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि गत 12 मई को त्विषा शर्मा कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली थी। जांच सीबीआई कर रही है। आरोपित सास गिरिबाला और उनका बेटा व त्विषा का पति अधिवक्ता समर्थ सिंह, दोनों ही भोपाल की सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
उल्लेखनीय है कि गिरिबाला की जमानत अर्जी तीन अलग-अलग अदालतों में स्थानांतरित होती हुई सीबीआइ की विशेष अदालत के न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा के समक्ष पहुंची थी।
सबसे पहले 10वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
इसके बाद 8वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा और 11वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया।
इसके बाद मामला न्यायाधीश नीलम शुक्ला के समक्ष पहुंचा, लेकिन उन्होंने भी गिरिबाला के अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का हवाला दिया। सीबीआइ की विशेष अदालत ने शुक्रवार को बहस के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।
स्वास्थ्य और उम्र का तर्क नहीं आया काम
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गिरिबाला की उम्र, जेल में वजन कम होने, डायरिया और वायरल फीवर से पीड़ित होने, लगभग 100 वर्षीय बीमार मां की देखभाल की आवश्यकता तथा मृतका पुत्रवधु त्विषा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वहन जैसे आधारों पर जमानत की मांग की गई थी। लेकिन अदालत ने इन कारणों को नियमित जमानत के लिए पर्याप्त या असाधारण आधार मानने से इनकार कर दिया।
