कुकी और मैतेई समुदाय के बीच फासला मिटाने की कोशिश, तीन साल में पहली बार 2 Kuki MLA पहुंचे इंफाल
तीन साल बाद दो कुकी विधायकों ने समुदाय के निर्देशों को दरकिनार कर इंफाल में मणिपुर विधानसभा सत्र में भाग लिया।

तीन साल में पहली बार 2 कुकी MLA पहुंचे इंफाल (फोटो-एएनआइ)
HighLights
दो कुकी विधायक तीन साल बाद इंफाल पहुंचे।
समुदाय के निर्देश के खिलाफ विधानसभा सत्र में हुए शामिल।
सीएम ने इसे समुदायों में विश्वास बहाली का प्रयास बताया।
डिजिटल डेस्क, इंफाल। मणिपुर की राजधानी इंफाल में बीते तीन साल में कई बार हिंसा भड़की है। इस हिंसा ने पहाड़ी और घाटी के इलाकों के बीच एक ऐसी खाई पैदा कर दी है जिसे अभी तक भरा नहीं जा सका है।
पहाड़ी और घाटी के इलाकों के बीच दूरियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुकी समुदाय के दो MLA ऐसे हैं, जो इन तीन सालों में पहली बार इंफाल गए हैं।
पार्टी के आदेश को नहीं माना
बुधवार, 2 सितंबर को दो कुकी MLA ने अपनी कम्युनिटी के 'व्हिप' (पार्टी के आदेश) को नजरअंदाज करते हुए इंफाल की यात्रा की। 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से यह पहली बार था जब वे व्यक्तिगत रूप से मणिपुर विधानसभा सत्र में शामिल हुए।
कांगपोकपी जिले के सैकुल से विधायक किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग (कुकी पीपल्स अलायंस - KPA) और सैतू से निर्दलीय विधायक हाओखोलेट किपजेन ने विधानसभा सत्र के पहले दिन वहां मौजूद रहने का फैसला किया।
कुकी विधायकों ने ऐसा तब किया जब 'कुकी इनपी मणिपुर' ने साफ तौर पर निर्देश दिया था कि वे मैतेई-बहुल इंफाल से दूर रहें।
डिप्टी CM नेमचा किपजेन और उनके BJP सहयोगी, हेंगलेप के विधायक लेत्जामंग हाओकिप, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सत्र में शामिल हुए। BJP के अन्य चार कुकी MLA सत्र से दूर रहे।
मणिपुर में कुल नौ कुकी, जो MLA हैं, जिनमें KPA के दो MLA भी शामिल हैं। इनमें से छह ने पिछले साल फरवरी में बजट सत्र में ऑनलाइन (वर्चुअली) हिस्सा लिया था।
समुदायों के बीच फासले मिटाने की कोशिश
CM वाई. खेमचंद सिंह के ऑफिस ने एक बयान जारी कर दोनों कुकी MLA की तारीफ की और इसे विधानसभा में उनकी ऐतिहासिक भौतिक वापसी बताया। बयान में कहा गया, 'उनकी यह उपस्थिति साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद हुई है। इस दौरान कम्युनिटी के प्रतिनिधियों ने सदन की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया था।'
सीएम वाई. खेमचंद सिंह ने इन दोनों MLA के सकारात्मक कदम का श्रेय BJP के नेतृत्व वाली सरकार की उन कोशिशों को दिया, जिनका मकसद समुदायों के बीच भरोसे की कमी को कम करना है। सिंह ने कहा, 'सामूहिक प्रयासों से मणिपुर शांति की राह पर चलने की कोशिश कर सकता है।'
