भारत में मकड़ी की दो नई प्रजातियां मिलीं, मेघालय की गुफा और आंध्र प्रदेश के जंगल में हुई खोज
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने भारत में मकड़ी की दो नई प्रजातियों की खोज की है, जिनमें से एक मेघालय की गुफा और दूसरी आंध्र प्रदेश के पापीको ...और पढ़ें
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मकड़ी की मिलीं नई प्रजातियां। - जेडएसआई
HighLights
जेडएसआई ने खोजी मकड़ी की दो नई प्रजातियां।
एक मेघालय की गुफा, दूसरी आंध्र प्रदेश के जंगल में।
भारत की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण।
राजीव कुमार झा, कोलकाता। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के वैज्ञानिकों ने देश में मकड़ी की दो नई प्रजातियों की खोज की है। इनमें से एक मेघालय की गुफा में और दूसरी आंध्र प्रदेश के पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान में मिली है। इस खोज को भारत की जैव विविधता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मेघालय की क्रम लाबाह गुफा में मिली मकड़ी का नाम सिमोनिया लाबाह रखा गया है। यह बहुत छोटी है और इसकी लंबाई दो मिलीमीटर से भी कम है। यह गुफाओं में रहती है और शंकु के आकार का खास जाल बनाकर उड़ने वाले कीड़ों का शिकार करती है।
इस प्रजाति की खोज जेडएसआइ, कोलकाता मुख्यालय के सुप्रदीप्त दत्ता, पुथूर पट्टम्मल सुधीन, डा. सौविक सेन, निदेशक डा. धृति बनर्जी तथा शिलांग स्थित पूर्वोत्तर क्षेत्रीय केंद्र के राजीव गोस्वामी की संयुक्त टीम ने की।
आंध्र प्रदेश में मिली हामाटालिवा पापीकोंडा
दूसरी नई प्रजाति हामाटालिवा पापीकोंडा आंध्र प्रदेश के पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान में मिली है। इसकी लंबाई पांच मिलीमीटर से भी कम है। पीले रंग की यह मकड़ी जाल नहीं बनाती, बल्कि अपनी फुर्ती, कांटेदार पैरों और आठ आंखों की विशिष्ट षट्कोणीय संरचना की मदद से पेड़ों पर शिकार करती है। इस प्रजाति की खोज जेडएसआई की वैज्ञानिक उपासना भट्टाचार्य, पुथूर पट्टम्मल सुधीन और डा. सौविक सेन ने की।
जेडएसआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि इन खोजों से पता चलता है कि भारत के जंगलों और गुफाओं में अभी भी कई ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी जानकारी विज्ञान को नहीं है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में लगातार वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण की जरूरत है। इन दोनों प्रजातियों की खोज से जुड़ा शोध अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं में भी प्रकाशित किया गया है।
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जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण खोज
जेडएसआई की निदेशक डा. धृति बनर्जी ने कहा कि हर नई प्रजाति की खोज भारत की समृद्ध जैव विविधता को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि ये खोजें इस बात को भी रेखांकित करती हैं कि गुफाओं और घने जंगलों जैसे संवेदनशील प्राकृतिक आवासों को बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।