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संयुक्त राष्ट्र ने पास किया 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव, अब सही आकार में दिखेंगे भारत और अफ्रीकी देश

Published: Sat, 05 Sep 2026 07:45 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव पारित किया है, जिससे अब महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र में 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव पारित

संयुक्त राष्ट्र में 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव पारित

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक मानचित्रों को महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने वाला ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित कर दिया है।

टोगो की ओर से पेश और अफ्रीकी संघ के समर्थन वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देश रहे। अकेला विरोध संयुक्त राज्य अमेरिका का रहा जबकि एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान से दूरी बनाई।

भारत ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए उसके पक्ष में वोट दिया। वैसे यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है लेकिन अब विभिन्न सरकारें व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्कूलों, मीडिया, डिजिटल प्लेटफार्म और आधिकारिक नक्शों में मौजूदा मर्केटर प्रक्षेपण की जगह समान-क्षेत्रफल वाले नक्शों को बढ़ावा दे सकेंगे।

मोटे तौर पर दुनिया के नक्शे में अब भारत का नक्शा बड़ा दिखेगा। अफ्रीका व दर्जनों अन्य देशों का नक्शा भी सही तरीके से सामने आएगा।

बताते चलें कि यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया क्योंकि सदियों से चले आ रहे मर्केटर नक्शे ने दुनिया का चित्र सही तरीके से सामने नहीं आता।

सोलहवीं सदी में शिपिंग करने वालों के लिए बना नक्शा बनाने का यह तरीका ध्रुवों के पास के इलाकों को बड़ा और भूमध्य रेखा के पास के महाद्वीपों को छोटा दिखाता है। नतीजा यह कि ग्रीनलैंड से अफ्रीका 14 गुणा बड़ा होने के बावजूद नक्शे में उससे छोटा दिखाया जाता है।

अमेरिका और कई पश्चिमी देश मानचित्र पर वास्तविक क्षेत्रफल से ज्यादा विशाल खंड की तरह उभरते हैं जबकि अफ्रीका, दक्षिण एशिया का आकार छोटा व सिकुड़ा पेश किया जाता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह विकृति दुनिया की असंतुलित छवि बनाती है। वैसे इससे भारत पर कोई सीधा असर नहीं होगा।

किसी देश का भौगोलिक क्षेत्रफल नहीं बढ़ने जा रहा, फर्क यह होगा कि समान-क्षेत्रफल वाले नक्शों पर भारत और दक्षिण एशिया यूरोप व उत्तरी अमेरिका के मुकाबले ज्यादा वास्तविक अनुपात में दिखेंगे। कक्षाओं और समाचारों में देश का भौगोलिक वजन अब छोटा नहीं लगेगा।

भारत ने साफ किया कि है कि वह ऐसे नक्शे का समर्थन करता है जो महाद्वीपों का आपसी आकार सही रखें। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रथम सचिव रघू पुरी ने कहा कि नक्शे यह तय करते हैं कि समाज भूगोल और दुनिया के पैमाने को कैसे समझता है। इसलिए भारत प्रस्ताव के इरादे का स्वागत करता है।

उन्होंने जोड़ा कि इसे किसी एक कार्टोग्राफिक पद्धति का समर्थन नहीं समझा जाना चाहिए। अब आगे स्कूल की किताबें, सरकारी प्रस्तुतियाँ और डिजिटल मानचित्र कितनी जल्दी बदलते हैं, यह सदस्य देशों और संस्थानों पर निर्भर करेगा।