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केंद्र सरकार ने अरुणाचल में भेजे RAF के 250 जवान, सियांग बांध के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के बाद एक्शन

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:13 PM (IST)

अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध में हुई हिंसक घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां भेजी हैं।

अरुणाचल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर हिंसक प्रदर्शन के बाद तोड़फोड़(फोटो: एएनआई)

अरुणाचल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर हिंसक प्रदर्शन के बाद तोड़फोड़(फोटो: एएनआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में प्रस्तावित 11200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की दो कंपनियां भेजी हैं।

गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के लगभग 250 जवानों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से नवी मुंबई से पासीघाट एयरलिफ्ट किया गया है।

पासीघाट में आगजनी और तोड़फोड़ के बाद एक्शन में सरकार

पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में शुक्रवार रात को विरोध प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने एनएचपीसी के कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी। इसके अलावा, राज्य भाजपा अध्यक्ष और दो विधायकों के आवासों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।

लगभग नौ घंटे तक रुक-रुक कर चली इस हिंसा और पथराव में 40 से अधिक पुलिस और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। आंसू गैस का गोला लगने से एक प्रदर्शनकारी भी घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हिंसा और तनाव को देखते हुए पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पासीघाट, मेबो और रुकसिन में सार्वजनिक सभाओं, रैलियों और जुलूसों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।

संवेदनशील इलाकों में पहले से तैनात सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के जवानों ने स्थिति को संभालने के लिए फ्लैग मार्च किया और अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।

क्यों हो रहा है इस परियोजना का विरोध?

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पासीघाट की घटनाओं को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए। सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रस्तावित 11200 मेगावाट की सियांग परियोजना को तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, स्थानीय जनजातीय समुदाय इसका लगातार विरोध कर रहे हैं।

उनका मानना है कि बांध के विशाल जलाशय से कई गांव जलमग्न हो जाएंगे, उपजाऊ जमीनें डूब जाएंगी और सदियों पुराना प्राकृतिक व सांस्कृतिक जुड़ाव खत्म हो जाएगा। तिब्बत से निकलने वाली सियांग नदी असम में दिबांग और लोहित से मिलकर ब्रह्मपुत्र का निर्माण करती है।

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