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'भारतीय यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं': eMudhra विवाद पर सरकार ने कहा- 'पूरी तरह सुरक्षित हैं देसी ऐप्स'

Published: Thu, 22 Oct 2026 02:14 AM (IST)

ई-मुद्रा के डिजिटल सर्टिफिकेट किसी भी ब्राउजर को यह पुष्टि करने में मदद करते हैं कि कोई वेबसाइट असली है ...और पढ़ें

ई-मुद्रा के 'कमजोर डिजिटल की' घटना का भारतीय वेबसाइटों और एप पर बेहद सीमित असर : सरकार

ई-मुद्रा के 'कमजोर डिजिटल की' घटना का भारतीय वेबसाइटों और एप पर बेहद सीमित असर : सरकार

HighLights

  1. ई-मुद्रा के 'कमजोर डिजिटल की' घटना का भारतीय वेबसाइटों और एप पर बेहद सीमित असर : सरकार

  2. सरकार ने ई-मुद्रा की ओर से जारी आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स में खामी की जांच के लिए विशेष टीम बनाई

  3. ई-मुद्रा के डिजिटल सर्टिफिकेट ब्राउजर को यह पुष्टि करने में मदद करते हैं कि वेबसाइट असली है या नहीं

पीटीआई, नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय सर्टिफिकेट अथॉरिटी ई-मुद्रा द्वारा जारी आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स में बहुत बड़ी खामी पाई गई। इनमें मौजूद सिक्योरिटी कीज (सुरक्षा के लिए डिजिटल चाबी) बेहद कमजोर थीं, जिससे टेक कंपनियों में हड़कंप मच गया और यह सुनिश्चित करने के लिए भागदौड़ करनी पड़ी कि हैकर्स इसका फायदा न उठा ले।

इसे मामले में इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने ई-मुद्रा में हुई इस घटना की जांच के लिए विशेष टीम बनाई है।

दरअसल, ई-मुद्रा के डिजिटल सर्टिफिकेट किसी भी ब्राउजर को यह पुष्टि करने में मदद करते हैं कि कोई वेबसाइट असली है या नहीं। मंत्रालय ने कहा कि यह घटना मुख्य रूप से वैश्विक सर्टिफिकेट कारोबार से जुड़ी है और भारतीय वेबसाइटों तथा एप पर असर बहुत सीमित है।

सरकार का यह बयान बेहद अहम है, क्योंकि ई-मुद्रा ने जानकारी दी है कि उसके सर्टिफिकेट से जुड़ी प्राइवेट कीज सुरक्षित नहीं रह गई हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन की एक एडवाइजरी के बाद यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

मंत्रालय ने अपने बयान में कुछ इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स का भी जिक्र किया, जिनके बारे में कहा गया है कि वे इस घटना के असर को लेकर लोगों के बीच डर फैलाने का काम कर रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा कि ई-मुद्रा दो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करता है। पहला है डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट और ई-साइन सेवाएं जारी करना, जो इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथारिटीज द्वारा विनियमित होते हैं।

दूसरा काम है ऐसे डिजिटल सर्टिफिकेट जारी करना, जिन पर प्रमुख ब्राउजर और आपरेटिंग सिस्टम भरोसा करते हैं। इनका इस्तेमाल वेबसाइटों, साफ्टवेयर और ऑनलाइन संचार को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

दूसरा काम अंतरराष्ट्रीय स्तर का है और यह एक ग्लोबल ट्रस्ट फ्रेमवर्क के तहत काम करता है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा संचालित होता है और इसका स्वतंत्र आडिट किया जाता है, जिसमें बीडीओ इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा किया जाने वाला वेबट्रस्ट आडिट भी शामिल है। जिस घटना की बात हो रही है, उसका संबंध केवल इसी वैश्विक कामकाज से है और मंत्रालय इसके आडिट में शामिल नहीं है।

मंत्रालय ने कहा, "भारतीय वेबसाइटों और एप पर इस घटना का असर बहुत सीमित रहा और यह बहुत कम समय के लिए था।" मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रमाणन प्राधिकरण नियंत्रक द्वारा विनियमित डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट और ई-साइन सेवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इन पर कोई असर नहीं पड़ा है।