अमिताभ बच्चन के साथ हॉट सीट पर बैठे छत्तीसगढ़ के योगेश साहू, केबीसी में जीते 50 लाख; लेकिन यहां हो गई गलती
योगेश साहू ने छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के छोटे से गांव टेहका से निकलकर देश के सबसे लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' शो में शानदार तरीके से खेलते हुए 50 लाख रुपये जीते

योगेश साहू ने केबीसी में जीते 50 लाख रुपये, एक करोड़ के सवाल में फंसा पेंच
HighLights
योगेश साहू ने केबीसी में जीते 50 लाख रुपये, एक करोड़ के सवाल में फंसा पेंच
आईआईटी बॉम्बे के टॉपर हैं योगेश, कहा कि आइएएस अधिकारी बनने के लिए छोड़ी नौकरी
10वीं में हासिल किए थे 98 प्रतिशत अंक, आईआईटी 2025 के भी रहे हैं टॉपर
जेएनएन, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के छोटे से गांव टेहका से निकलकर देश के सबसे लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' की हॉट सीट तक पहुंचने को 23 वर्षीय योगेश साहू मंजिल नहीं बल्कि एक पड़ाव मानते हैं।
उन्होंने अमिताभ बच्चन के केबीसी शो में शानदार तरीके से खेलते हुए 50 लाख रुपये जीते। उन्होंने एक करोड़ रुपये के सवाल पर खेल छोड़ दिया। उनका सपना आइएएस अधिकारी बनना है।
शुक्रवार को वे रायपुर के दानी गर्ल्स स्कूल में यूपीएससी की मुख्य परीक्षा देने के लिए पहुंचे। परीक्षा केंद्र पर पिता गयाराम साहू भी उनके साथ थे। परीक्षा के बाद नईदुनिया से बातचीत में योगेश ने अपने संघर्ष, सपनों और केबीसी तक पहुंचने की कहानी साझा की।
योगेश ने बताया कि 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया था। इसके बाद जेईई में सफल हुए और आइआइटी बांबे में विद्युत अभियांत्रिकी (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) में प्रवेश लिया।
वे आईआईटी 2025 के भी टॉपर हैं। योगेश के सामने करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का विकल्प था, लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी को चुना।
नौकरी मिलने पर योगेश ने अपने पिताजी से कहा था कि इस नौकरी से परिवार की आर्थिक स्थिति तो सुधर सकती है लेकिन इससे उनका आईएएस बनने का सपना छूट जाएगा।
बता दें कि योगेश के पिता गयाराम साहू वरिष्ठ भाजपा नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के यहां चालक हैं। मुश्किल हालात में मिली मदद ने राह आसान की योगेश की प्रतिभा को समय-समय पर समाज और प्रशासन का साथ भी मिला।
शुरुआती पढ़ाई बलौदाबाजार के जेसीज कॉन्वेंट और मयूर शिशु मंदिर से हुई। आगे की पढ़ाई के लिए बिलासपुर पहुंचे तो रोहन चावला ने अपने कोचिंग सेंटर में उन्हें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई निश्शुल्क कराई।
तत्कालीन कलेक्टर कार्तिकेय गोयल ने भी उनकी पढ़ाई में सहयोग किया। तत्कालीन भूपेश सरकार के समय चार लाख रुपये और विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल में दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली।
सीनियर को देख केबीसी तक पहुंचने का सोचा
उन्होंने बताया कि उनके रूम पार्टनर और एक सीनियर केबीसी में पहुंचे थे। उन्हें देखकर लगा कि जब वे वहां पहुंच सकते हैं, तो मैं भी कोशिश कर सकता हूं। 50 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचते-पहुंचते खेल रोमांचक हो चुका था।
जीवनरेखा का इस्तेमाल करने के बाद मिले संकेत के आधार पर उन्होंने तिरुचिरापल्ली को उत्तर चुना और जवाब सही निकला। इसके साथ ही योगेश ने 50 लाख रुपये जीत लिए।
इसके बाद एक करोड़ रुपये का सवाल सामने था। यह सवाल 1943 में मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में हुए पहले इंडियन डर्बी से जुड़ा था। उत्तर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं होने पर योगेश ने जोखिम नहीं लिया और 50 लाख रुपये लेकर खेल छोड़ दिया।
