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    छत्तीसगढ़ में 18 साल पहले नकल से किया 12वीं स्टेट टॉप, अब पांच साल की जेल

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 02:00 AM (GMT+05:30)

    छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पोरा बाई नकल प्रकरण में लगभग 18 वर्षों बाद बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जीआर पटेल की अदालत ने छात्रा पो ...और पढ़ें

    छत्तीसगढ़ में 18 साल पहले नकल से किया 12वीं स्टेट टॉप (सांकेतिक तस्वीर)

    छत्तीसगढ़ में 18 साल पहले नकल से किया 12वीं स्टेट टॉप (सांकेतिक तस्वीर)

    HighLights

    1. छत्तीसगढ़ की छात्रा ने 2008 में दी थी परीक्षा, उत्तरपुस्तिका से नहीं मिली राइटिंग 

    2. नतीजे घोषित होने के बाद हुआ संदेह, जांच में पकड़ी गई गड़बड़ी 

    जेएनएन, जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पोरा बाई नकल प्रकरण में लगभग 18 वर्षों बाद बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जीआर पटेल की अदालत ने छात्रा पोरा बाई सहित चार को दोषी करार दिया है।

    न्यायालय ने पोरा बाई, फूलसाय नृसिंह, एसएल जाटव एवं दीपक जाटव को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

    यह मामला वर्ष 2008 का है, जब माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं की परीक्षा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा की छात्रा पोरा बाई ने प्रदेश की प्रवीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद मंडल के अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद जांच कराई गई।

    जांच में पाया गया कि छात्रा का प्रवेश और उत्तरपुस्तिका संदिग्ध है तथा दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है। इस प्रकरण में तत्कालीन प्राचार्य एसएल जाटव, केंद्राध्यक्ष फूलसाय नृसिंह, सहायक केंद्राध्यक्ष बालचंद भारती सहित अन्य शामिल थे।

    मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चांपा सुबोध कुमार मिश्रा की अदालत में हुई, जहां 27 दिसंबर 2020 को सभी नौ आरोपितों को बरी कर दिया गया था।

    न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में कहा था कि जिन आशंकाओं के आधार पर मामला दर्ज किया गया, अभियोजन उन्हें प्रमाणित करने में असफल रहा। इसके बाद शासन की ओर से उक्त निर्णय के खिलाफ अपील दायर की गई।

    अपील की सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने साक्ष्यों और तर्कों का पुन: मूल्यांकन करते हुए चार आरोपितों को दोषी माना और सजा सुनाई। उल्लेखनीय है कि जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि पोरा बाई की उत्तरपुस्तिका बदली हुई पाई गई थी, उसमें उसकी राइटग नहीं थी।