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Exclusive: लाभार्थी बताएंगे सफलता की कहानी, सरकारी योजनाओं की बनेगी Reels; 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

Published: Tue, 22 Sep 2026 02:26 PM (IST)

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियां अब सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से साझा की जाएंगी। गाजियाबाद में ...और पढ़ें

लाभार्थी बनाएंगे रील्स। फोटो: एआई जनरेटेड

लाभार्थी बनाएंगे रील्स। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियां रील्स पर दिखेंगी

  2. गाजियाबाद में 'सेवा की कहानी-डिजिटल व रील अभियान' शुरू हुआ

  3. रील्स बनाने वाले जिलों की रैंकिंग भी जारी की जाएगी

शाहनवाज अली, गाजियाबाद। सरकारी योजनाओं से लाभ लेकर उद्यम खड़ा करने वाले लाभार्थियों की सफलता की कहानी अब सोशल मीडिया पर भी नजर आएगी।

जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की योजनाओं के लाभार्थियों द्वारा बनाई गई रील्स का भी अब शासन को हिसाब देना होगा। प्रदेश सरकार ने ‘सेवा की कहानी-डिजिटल व रील अभियान’ के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक के लिए सभी जिलों को गाइडलाइन जारी की है।

इसके तहत जिला स्तरीय रिपोर्ट में केवल योजनाओं की वित्तीय प्रगति बताना पर्याप्त नहीं होगा। इसमें लाभार्थियों द्वारा बनाई गई रील्स, विभाग की ओर से बनाई गई रील्स, जनप्रतिनिधियों की रील्स, इन्फ्लुएंसर, यूट्यूबर की रील्स और आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की गई कुल रील्स का अलग-अलग ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।

यानी उद्योग केंद्र को अब योजनाओं के लाभ के साथ यह भी बताना होगा कि उसकी डिजिटल पहुंच कितनी रही। इसके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एक जनपद एक उत्पाद और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शामिल हैं। योजनाओं लाभार्थियों में स्थानीय युवा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमी, हस्त शिल्पकार और कारीगर होते हैं।

पांच फोटो के साथ देनी होगी रिपोर्ट

शासन ने रिपोर्टिंग के लिए निर्धारित प्रारूप भी तय किया है। प्रत्येक जिले को अधिकतम पांच फोटो के साथ दिन, महीना और वर्ष प्रारूप में डेटा भेजना होगा। फोटो जेपीजी, जेपीईजी या पीएनजी फार्मेट में तथा 500 केबी से कम आकार की होनी चाहिए।

लाभार्थी खुद बताएंगे सफलता की कहानी

अभियान का जोर सरकारी योजनाओं का प्रचार लाभार्थियों की जुबानी कराने पर है। इसके तहत लाभार्थियों को अपनी इकाई, उत्पाद, रोजगार और योजना से मिले लाभ का अनुभव रील के माध्यम से साझा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इससे योजनाओं के संभावित लाभार्थियों तक वास्तविक सफलता की कहानियां पहुंचाने और युवा उद्यमियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इन लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को रील के जरिये सामने लाने की तैयारी है।

प्रभावी रील्स बनाने वाले जिलों को रैंकिंग की तैयारी

अभियान पूरा होने के बाद शासन स्तर से जिलों की डिजिटल गतिविधियों का आकलन किया जाएगा। सबसे अधिक और प्रभावी रील्स बनाने ले जिलों की रैंकिंग भी जारी किए जाने की तैयारी है। इससे उद्योग केंद्रों के लिए योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ डिजिटल गतिविधियों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।

सरकार की योजनाओं से लाभांवित हुए लाभार्थियों की रील्स बनाई जा रही हैं। इससे लाभार्थियों की जुबानी योजनाओं का प्रचार प्रसार होगा, जिससे अन्य पात्र लोग भी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। योजना से संबंधित रील्स और फोटो संबंधित पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं।

- आशुतोष सिंह, उपायुक्त उद्योग

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