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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bangladeshi Infiltration: ओडिशा पहुंचाने के लिए 35 हजार लेते हैं एजेंट, बांग्लादेशी घुसपैठ ने किया बड़ा खुलासा

    Updated: Sat, 29 Mar 2025 09:54 PM (IST)

    ओडिशा में बांग्लादेशी घुसपैठ का बड़ा खुलासा हुआ है। बिचौलियों की मदद से असम के रास्ते घुसपैठिए अवैध रूप से ओडिशा में प्रवेश कर रहे हैं। प्रत्येक घुसपै ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    HighLights

    1. प्रत्येक घुसपैठिया ओडिशा पहुंचने के लिए एजेंटों को लगभग 35,000 रुपये का करता है भुगतान
    2. 8 मार्च को एसटीएफ ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा था, चल रही पूछताछ

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के लिए एक चिंता का विषय सामने आया है। बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े घुसपैठिए रैकेट के बारे में पूछताछ में नई जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, ये घुसपैठिए बिचौलियों या एजेंटों की मदद से असम के रास्ते सीमा पार करके अवैध रूप से ओडिशा में घुस रहे हैं।

    यह पता चला है कि प्रत्येक घुसपैठिया ओडिशा पहुंचने के लिए एजेंटों को लगभग 35,000 रुपये का भुगतान करता है तथा बांग्लादेश लौटने के लिए जगदीश दास नामक व्यक्ति को अतिरिक्त 30,000 रुपये देता है, जो कथित तौर पर पूरे अवैध नेटवर्क का मुख्य आरोपी है।

    इस रास्ते से ले जा रहे थे ओडिशा

    एसटीएफ एसपी रवि नारायण सतपथी ने बताया कि मोहम्मद हासिम बांग्लादेश से है और असम के रास्ते भारत में घुसा था और लोगों को ओडिशा लाया था।

    वह लोगों को जगदीश दास नामक व्यक्ति के घर पर रखता था। पिछले दो सालों से इस तरह की अवैध गतिविधियां चल रही थीं। वह इस काम के लिए कमीशन लेता था।

    इस रैकेट के एक प्रमुख व्यक्ति मोहम्मद हासिम ने ओडिशा क्राइम ब्रांच के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को दो दिन की रिमांड के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

    उसके बयानों से पता चलता है कि इन घुसपैठियों को व्यवस्थित तरीके से भारत में लाया जाता है और उनके रहने को वैध बनाने के लिए आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित नकली पहचान दस्तावेज हासिल करने में उनकी मदद की जाती है।

    हासिम की वैज्ञानिक साक्ष्य-आधारित जांच ने पुष्टि की है कि इस तरह के जाली दस्तावेज बांग्लादेशी नागरिकों को मोटी रकम के बदले में दिए जा रहे थे।

    सुरक्षा खामियों का फायदा उठाया जा रहा है, क्योंकि घुसपैठिए कथित तौर पर अंधेरे में सीमा पार कर ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों में फैल जाते हैं।

    40 बांग्लादेशी नागरिकों की हो चुकी पहचान

    खुफिया सूत्रों से पता चलता है कि करीब 40 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है और उन्हें दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में निगरानी में रखा गया है।

    जांच से यह भी पता चला है कि इस रैकेट के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो कई राज्यों में अवैध प्रवेश और बसावट की सुविधा प्रदान करता है।

    इस अवैध गतिविधि पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए दिल्ली, असम और बेंगलुरु में एसटीएफ टीमों को तैनात किया गया है।

    गौरतलब है कि 8 मार्च को एसटीएफ ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा, जो चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण सफलता थी।

    इसके बाद, अपराध शाखा के अधिकारियों और एसटीएफ की विशेष शाखा ने संदिग्ध घुसपैठियों पर अपनी सतर्कता बढ़ा दी है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे अवैध संचालनों को ट्रैक करने और खत्म करने के लिए एक समर्पित विशेष टीम का गठन किया गया है।

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