Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    राउरकेला के सीआरपीएफ कैंप में जवान ने की आत्महत्या, सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 05:06 PM (IST)

    राउरकेला के मटकमझरण सीआरपीएफ कैंप में एक हवलदार सुभाष प्रसाद ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। 56 वर्षीय जवान उत्तर प्रदेश के ...और पढ़ें

    HighLights

    1. सीआरपीएफ हवलदार ने मटकमझरण कैंप में खुद को गोली मारी।

    2. मृतक जवान सुभाष प्रसाद, उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी थे।

    3. व्यक्तिगत तनाव को आत्महत्या का संभावित कारण बताया गया।

    जागरण संवाददाता, राउरकेला। राउरकेला के लाठीकाटा पुलिस सीमा के अंतर्गत आने वाले मटकमझरण सीआरपीएफ कैंप में सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सीआरपीएफ के एक हवलदार ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

    मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश बलिया जिला नंदगांव निवासी 56 वर्षीय सुभाष प्रसाद के रूप में हुई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कैंप परिसर के भीतर अचानक हुई इस घटना से हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे।

    हालांकि, इस आत्मघाती कदम के पीछे के सटीक कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन विभागीय सूत्रों और शुरुआती कयासों के मुताबिक वह पिछले कुछ समय से व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्याओं के कारण मानसिक तनाव में थे।

    CRPF Jawan Suicide

    घटनास्थल पर जुटे लोग। (जागरण)

    घटना की सूचना मिलते ही लाठीकाटा पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव को उसके पैतृक गांव भेजने की तैयारी की जा रही थी।

    खबरें और भी

    उल्लेखनीय है कि ओडिशा-झारखंड सीमा पर माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से इस सीआरपीएफ कैंप की स्थापना पिछले साल अक्टूबर में ही की गई थी।

    इस कैंप का उद्घाटन पश्चिमी रेंज के डीआईजी बृजेश राय ने राउरकेला एसपी नितेश वधवानी की उपस्थिति में किया था। अपनी स्थापना के समय से ही यह कैंप न केवल सुरक्षा बल्कि सामाजिक सरोकारों के लिए भी चर्चा में रहा है, जहां सुरक्षाबलों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन और स्कूली बच्चों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण जैसे सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं।

    सुरक्षा के मोर्चे पर तैनात एक जवान द्वारा इस तरह का कदम उठाए जाने से पूरे कैंप में शोक की लहर है और पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या कार्यस्थल पर किसी तरह का दबाव था या यह पूरी तरह से निजी कारणों से उपजा अवसाद था। शाम को ऊर्जा पुलिस लाइन में जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।