भारत ने दुनिया को दिखाई ताकत, अग्नि के बेड़े में MIRV तकनीक से लैस मिसाइल शामिल; कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम
भारत ने हाल ही में एमआईआरवी तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। ...और पढ़ें


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लावा पांडे, बालेश्वर। अग्नि मिसाइल भारत द्वारा विकसित की गई सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलो की एक श्रृंखला है। आज भारत के पास अग्नि 1, अग्नि 2, अग्नि 3, अग्नि 4 और अग्नि 5 नामक मिसाइल मौजूद है।
इसके साथ ही 8 मई 2026 को भारत ने ओडिशा के तट से एमआईआरवी तकनीक से लैस एक उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है।
भारत ने "मिशन दिव्यास्त्र" के तहत उन्नत अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है जो कि एमआईआरवी तकनीक का उपयोग करती है। इसका मतलब यह है कि एक ही मिसाइल कई परमाणु वारहेड ले जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है।

इसी तरह भारत के पास अग्नि 5 नामक मिसाइल भी मौजूद है, जिसे भारत का ब्रह्मास्त्र कहा जाता है। इसकी मारक क्षमता 5 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा है। इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) भी कहा जाता है।
यह पूरे एशिया और यूरोप के अधिकांश इलाकों को निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है। अग्नि सीरीज की सभी मिसाइलें एक हजार किलोग्राम से अधिक के परमाणु हथियार ले जाने की ताकत रखते है।
यह मिसाइल श्रृंखला मुख्य रूप से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित की गई हैं और भारतीय सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज चाहे "क्रूज़" सीरीज की मिसाइलें हो या फिर "बैलिस्टिक" सीरीज की मिसाइले हो सभी मिसाइलों का स्वदेशी ज्ञान कौशल से संपूर्ण रूप से भारत में ही निर्माण किया जाने लगा है।

आज विश्व के बाजार में भारतीय मिसाइलों की टेक्नोलॉजी और विभिन्न मिसाइलों की मांग बढ़ने लगी है। कोरोना जैसे महामारी के समय भी भारत ने कई ताकतवर मिसाइलों का परीक्षण किया था। मिसाइल के क्षेत्र में पूरे विश्व में आज भारत की ताकत किसी से छुपा नहीं है।
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सूत्रों की माने तो आने वाले चंद वर्षों में भारत कई अपने पुराने मिसाइलों का आधुनिकरण करेगा और कई नए किस्म के मिसाइलों का परीक्षण करेगा क्योंकि सारा विश्व जानता है कि आने वाले दिनों में "मिसाइलें ही करेंगी युद्ध का फैसला"।