Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ओडिशा: पहंडी में भगवान जगन्नाथ बिना 'ताहिया' के दिखे, परंपरा में अभूतपूर्व चूक पर उठे सवाल

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 09:27 PM (IST)

    विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के पहंडी बीजे में पारंपरिक 'ताहिया' के बिना रथ तक पहुंचने से लाखों श्रद्धालु चिंतित हैं। इस ...और पढ़ें

    पहंडी में भगवान जगन्नाथ बिना 'ताहिया' के दिखे, परंपरा में अभूतपूर्व चूक पर उठे सवाल

    पहंडी में भगवान जगन्नाथ बिना 'ताहिया' के दिखे, परंपरा में अभूतपूर्व चूक पर उठे सवाल

    HighLights

    1. भगवान जगन्नाथ पहंडी के दौरान बिना ताहिया के दिखे।

    2. लाखों श्रद्धालुओं और जानकारों ने इस चूक पर चिंता जताई।

    3. घटना की पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग।

    जागरण संवाददाता, अनुगुल (ओडिशा)। विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान गुरुवार को पहंडी बीजे की एक अभूतपूर्व घटना ने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर दिया। भगवान श्रीजगन्नाथ पारंपरिक 'ताहिया' (विशेष पुष्प मुकुट) के बिना ही पहंडी करते हुए रथ तक पहुंचे।

    सदियों पुरानी इस परंपरा में हुई इस असामान्य चूक को लेकर श्रद्धालुओं, सेवायतों और जगन्नाथ संस्कृति के जानकारों ने गंभीर चिंता जताई है तथा पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग उठाई है।

    ताहिया भगवान जगन्नाथ की पहंडी का अभिन्न अंग माना जाता है। बांस, बेंत, शोला और सुगंधित सफेद फूलों से तैयार यह विशाल मुकुट भगवान की दिव्यता और पहंडी की गरिमा का प्रतीक होता है। परंपरा के अनुसार इसका निर्माण पुरी के राघव दास मठ से जुड़े वंशानुगत कारीगर करते हैं।

    भगवान जगन्नाथ के लिए 37, भगवान बलभद्र के लिए 33 और देवी सुभद्रा के लिए 12 बांस की छड़ों के निर्धारित अनुपात से ताहिया तैयार किया जाता है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहंडी के सबसे महत्वपूर्ण चरण में भगवान जगन्नाथ के मस्तक पर ताहिया नहीं था। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली और लोगों ने इसे परंपरा के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बताया।

    हालांकि, अब तक श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) या राज्य सरकार की ओर से यह आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि ताहिया "गायब" या "लापता" हो गया था। उपलब्ध जानकारी केवल यह दर्शाती है कि पहंडी के दौरान भगवान ताहिया के बिना दिखाई दिए। इसलिए "ताहिया लापता" होने का दावा आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।

    खबरें और भी

    श्रद्धालुओं और जगन्नाथ संस्कृति के जानकारों ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि ताहिया पहंडी के समय भगवान को क्यों नहीं पहनाया गया, क्या यह सेवायतों और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी थी अथवा किसी अन्य कारण से यह स्थिति उत्पन्न हुई।

    उनका कहना है कि श्रीमंदिर की प्रत्येक परंपरा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है, इसलिए इस मामले की पारदर्शी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।