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    रथयात्रा में VIP कल्चर पर बहस: जगन्नाथ तो जन-जन के नाथ हैं, फिर आम भक्त क्यों हों परेशान?

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 09:51 AM (IST)

    विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा में वीआईपी संस्कृति पर फिर बहस छिड़ गई है, जिससे आम भक्तों को दर्शन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. रथयात्रा में वीआईपी संस्कृति पर फिर से बहस।

    2. आम भक्तों को दर्शन में हो रही असुविधा।

    3. जगन्नाथ जन-जन के, प्राथमिकता आम श्रद्धालुओं को।

    शेषनाथ राय, पुरी। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान वीआईपी संस्कृति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व में आम भक्तों की सुविधा और वीआईपी व्यवस्थाओं के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    कई भक्तों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि रथयात्रा का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराना है, इसलिए इस पर्व में जनसाधारण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार श्रीमंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। नेताओं, अधिकारियों, न्यायाधीशों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को वर्षभर विशेष प्रोटोकॉल के तहत दर्शन का अवसर मिलता है, लेकिन रथयात्रा आम श्रद्धालुओं के लिए होती है। ऐसे में वीआईपी मूवमेंट और उनके लिए बनाए गए प्रतिबंधित क्षेत्रों के कारण आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

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    कुछ भक्तों ने कहा कि रथ खींचने का कार्य समाप्त होने के बाद जब भीड़ का दबाव कम हुआ तो हजारों श्रद्धालुओं ने बेहद सहज और शांत वातावरण में तीनों देवताओं के दर्शन किए। लोगों ने बिना धक्का-मुक्की के रथों के निकट पहुंचकर दर्शन किए, तस्वीरें लीं और धार्मिक उत्सव का आनंद उठाया।

    भक्तों ने यह भी दावा किया कि पुरी के कई स्थानीय निवासियों ने वीआईपी व्यवस्थाओं के कारण होने वाली परेशानियों पर नाराजगी जताई। सुरक्षा घेराबंदी के चलते कई इलाकों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। वहीं, देर रात आसपास के जिलों और कस्बों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपेक्षाकृत कम भीड़ में आराम से दर्शन कर संतोष व्यक्त किया।

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    रथयात्रा के दौरान इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। हालांकि हर साल की तरह इस बार भी यह सवाल चर्चा में है कि क्या जनआस्था के इस सबसे बड़े उत्सव में वीआईपी व्यवस्थाओं का दायरा सीमित किया जाना चाहिए ताकि आम श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिल सके।

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    • रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान का आम लोगों के बीच आना है।
    • वीआईपी मूवमेंट के दौरान कई क्षेत्रों में आम श्रद्धालुओं की आवाजाही सीमित हो जाती है।
    • रथ खींचने के बाद श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत सहज दर्शन का अवसर मिला।
    • स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा प्रतिबंधों से दैनिक जीवन भी प्रभावित होता है।

    गौरतलब है कि भगवान जगन्नाथ को ‘जन-जन का भगवान’ कहा जाता है। रथयात्रा उनकी उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें वे स्वयं भक्तों के बीच आते हैं। ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि आम श्रद्धालुओं को इस दिव्य अवसर का भरपूर लाभ मिल सके।

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