भगवान जगन्नाथ क्यों धारण करते हैं 'गणेश रूप'? देव स्नान पूर्णिमा से जुड़ी है रोचक कहानी
भगवान जगन्नाथ का गजानन वेश स्नान पूर्णिमा से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत गणपति भट्ट को दिए गए भगवान के वरदान से हुई। इस परंपरा के बाद 15 दिनों तक भगवान अस् ...और पढ़ें

भगवान जगन्नाथ क्यों धारण करते हैं 'गणेश रूप'
जागरण संवाददाता, पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के गजानन वेश को लेकर एक प्रचलित किंवदंती है। मान्यता के अनुसार, महाराष्ट्र के एक परम गणेश भक्त गणपति भट्ट ने जब श्रीक्षेत्र की महिमा सुनी तो वे भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी पहुंचे। वे भगवान गणेश के अनन्य उपासक थे।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दारु विग्रह के दर्शन करने के बाद उन्हें उसमें गजानन स्वरूप दिखाई नहीं दिया। इससे उन्होंने भगवान जगन्नाथ को परब्रह्म मानने से इनकार कर दिया और निराश होकर मंदिर से लौट गए।
गणपति भट्ट को स्नान यात्रा देखने के लिए आमंत्रित किया
अगले दिन देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान की आज्ञा से बड़े पांडा ने गणपति भट्ट को स्नान यात्रा देखने के लिए आमंत्रित किया। स्नान अनुष्ठान के दौरान उनके सामने भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र के विग्रहों ने दिव्य रूप धारण कर लिया और उन्हें गणपति स्वरूप के दर्शन हुए।
इस अलौकिक दृश्य ने गणपति भट्ट का संशय दूर कर दिया और उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। भक्त की अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें वरदान दिया कि प्रत्येक वर्ष स्नान पूर्णिमा के दिन वे गजानन वेश धारण करेंगे। तभी से यह परंपरा आज तक चली आ रही है और स्नान पूर्णिमा के अवसर पर चतुर्धा विग्रह गजानन वेश में भक्तों को दर्शन देते हैं।
15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं भगवान
स्नान पूर्णिमा की सभी धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद श्रीविग्रह पहंडी के माध्यम से पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। इसके बाद उन्हें अनसर (अनवसर) गृह में विराजमान कराया जाता है और मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में प्रतिमूर्ति (पट्ट चित्र) की पूजा की जाती है।
खबरें और भी
धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। इस अवधि को अनसर या अनवसर कहा जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को श्रीजियों के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते।
ऐसी मान्यता है कि इस समय भगवान अलारनाथ मंदिर में दर्शन देते हैं, इसलिए बड़ी संख्या में भक्त ब्रह्मगिरि स्थित अलारनाथ मंदिर पहुंचकर प्रभु के दर्शन करते हैं।
यह भी पढ़ें- 108 कलशों के जल से हुआ महाप्रभु का स्नान, भक्तों को खुले मंच से दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ