देश के सबसे बड़े भूमिधारी देवताओं में शामिल श्रीजगन्नाथ महाप्रभु, 7 राज्यों में फैली 60 हजार एकड़ से अधिक जमीन
भगवान श्रीजगन्नाथ देश के सबसे बड़े भूमिधारी देवताओं में से एक हैं, जिनकी 60,822 एकड़ से अधिक भूमि 7 राज्यों ...और पढ़ें

HighLights
श्रीजगन्नाथ महाप्रभु 7 राज्यों में 60,822 एकड़ भूमि के मालिक।
ओडिशा सरकार ने अतिक्रमण हटाने और भूमि सत्यापन अभियान चलाया।
मंदिर की संपत्तियों के डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया जा रहा।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। भगवान श्रीजगन्नाथ केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े भूमिधारी देवताओं में भी शामिल हैं। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अभिलेखों के अनुसार महाप्रभु के नाम पर देश के सात राज्यों में 60,822 एकड़ से अधिक भूमि दर्ज है। इनमें अकेले ओडिशा में 60,426.943 एकड़ भूमि है, जबकि शेष 395.252 एकड़ बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में स्थित है।
इसमें से अनेक संपत्तियों पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। यही वजह है कि ओडिशा सरकार ने फरवरी 2026 में श्रीजगन्नाथ महाप्रभु लैंड सेल का गठन किया और राज्य के कई जिलों और दूसरे राज्यों में मंदिर की जमीनों का सत्यापन कराना शुरू कर दिया। पिछले दिनों इन संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू हो गई है।
इसमें सबसे अधिक फोकस ओडिशा के पुरी, खुर्दा, कटक, गंजाम, जगतसिंहपुर, जाजपुर और केंद्रापड़ा जिलों पर है। इसी कड़ी में दैनिक जागरण ने संपत्तियों और इससे जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर तीन दिवसीय सीरीज "श्रीजगन्नाथ महाप्रभु और उनकी संपत्तियां" शुरू की है। यह इसकी पहली किस्त है। ऐतिहासिक रूप से गजपति राजाओं और विभिन्न राजवंशों ने भगवान जगन्नाथ को राज्य का वास्तविक अधिपति (शासक) मानते हुए समय-समय पर भूमि दान की थी।
यही कारण है कि मंदिर की संपत्ति कई राज्यों तक फैली हुई है। अन्य राज्यों में सबसे अधिक 322.93 एकड़ भूमि बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र में दर्ज है। महाराष्ट्र के अकोला, मध्य प्रदेश के दमोह, जबलपुर और उज्जैन, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और बस्तर तथा बिहार के वैशाली जिले में भी मंदिर की भूमि मौजूद है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार महाप्रभु की सर्वाधिक भूमि ओडिशा के खुर्दा और पुरी जिलों में है। कुल संपत्ति का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन्हीं दोनों जिलों में स्थित है। खुर्दा जिले में लगभग 50 प्रतिशत तथा पुरी जिले में 30 प्रतिशत भूमि दर्ज है। मंदिर प्रशासन अब भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन पर भी जोर दे रहा है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से मंदिर की संपत्तियों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
जिलाधिकारियों को सरकार का निर्देश ओडिशा सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को श्रीजगन्नाथ मंदिर की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अतिक्रमण हटाने, लंबित राजस्व मामलों के निपटारे तथा रिकार्ड आफ राइट्स (आरओआर) में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन और अवैध हस्तांतरणों की जांच भी तेज करने को कहा गया है।
श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की भूमि मंदिर की संपत्ति है और इसे किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखा जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। विवादित मामलों का समाधान किया जाएगा तथा भूमि से प्राप्त आय का उपयोग मंदिर प्रशासन, धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाएगा। -पृथ्वीराज हरिचंदन, कानून मंत्री, ओडिशा
