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    Cuttack से Kataka तक: ओडिशा सरकार ने 64 स्थानों की स्पेलिंग में किया सुधार, अब अंग्रेजी में लिखे जाएंगे ऐसे

    Updated: Sat, 13 Jun 2026 12:14 PM (IST)

    ओडिशा मंत्रिमंडल ने 26 जिलों के 64 स्थानों की अंग्रेजी वर्तनी में बदलाव को मंजूरी दी है। यह निर्णय औपनिवेशिक काल की वर्तनी को ओड़िया उच्चारण और सांस्क ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ओडिशा मंत्रिमंडल ने 64 स्थानों की अंग्रेजी वर्तनी बदली।

    2. औपनिवेशिक काल की वर्तनी को ओड़िया उच्चारण के अनुरूप किया।

    3. कटक अब कटका, बालासोर अब बालेश्वर लिखा जाएगा।

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा मंत्रिमंडल ने राज्य के 26 जिलों में स्थित 64 स्थानों की अंग्रेजी वर्तनी (स्पेलिंग) में बदलाव को मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि औपनिवेशिक काल में कई स्थानों के नामों की अंग्रेजी वर्तनी ओड़िया उच्चारण और मूल स्वरूप से भटक गई थी, जिससे राज्य की भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही थी।

    मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि अब Cuttack को अंग्रेजी में 'Kataka', Balasore को 'Baleshwar', Angul को 'Anugola', Berhampur को 'Brahmapur', Deogarh को 'Debagada', Aul को 'Aali', Keonjhar को 'Kendujhar' और Jeypore को 'Jayapur' लिखा जाएगा।

    उन्होंने कहा कि कई स्थानों की वर्तमान अंग्रेजी वर्तनी ओड़िया भाषा के वास्तविक उच्चारण के अनुरूप नहीं है। इससे ओड़िया संस्कृति और 'ओड़िया अस्मिता' को नुकसान पहुंच रहा था। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने इन नामों को उनके मूल स्वरूप के अनुरूप पुनर्स्थापित करने का निर्णय लिया है।

    मुख्य सचिव ने कहा कि यह पहल ओडिशा की भाषाई विरासत, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक प्रामाणिकता को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के लिए की गई है।

    मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा इस मुद्दे पर चिंता जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को ऐसे स्थानों की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा था, जिनकी आधिकारिक अंग्रेजी वर्तनी उनके मूल ओड़िया नामों से भिन्न है। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और जिला प्रशासन से प्राप्त सुझावों के आधार पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया।

    ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता प्रख्यात साहित्यकार डॉ. प्रतिभा राय की अध्यक्षता वाली समिति ने इन प्रस्तावों की समीक्षा की। एक माह तक जनता से सुझाव लेने के बाद समिति ने अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपीं, जिन्हें मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी।

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    सरकार अब राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित करेगी। इसके बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारतीय रेलवे, डाक विभाग, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त सहित विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और मंत्रालयों के रिकॉर्ड में भी इन संशोधित नामों को शामिल किया जाएगा।

    राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज अधिकारियों ने स्थानीय नामों को अंग्रेजी उच्चारण के अनुसार लिखना शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भी वही नाम सरकारी अभिलेखों, नक्शों, रेलवे दस्तावेजों, डाक रिकॉर्ड और प्रशासनिक संचार में बने रहे। अब कैबिनेट के इस निर्णय के बाद संबंधित स्थानों पर लगे सरकारी साइनबोर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी नए नामों को लागू किया जाएगा।

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