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RTI का जवाब न देना पड़ा भारी, ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने TAMDA के 3 पूर्व अफसरों पर लगाया जुर्माना

Published: Sat, 29 Aug 2026 02:06 PM (IST)

ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई का जवाब न देने और आयोग के सवालों का उत्तर न देने पर TAMDA के तीन पूर्व अधिकारियों पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया है।

TAMDA के 3 पूर्व अफसरों पर लगाया जुर्माना (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

TAMDA के 3 पूर्व अफसरों पर लगाया जुर्माना (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. ओडिशा आयोग ने TAMDA के तीन पूर्व अधिकारियों पर ₹8,000 जुर्माना लगाया।

  2. आरटीआई जानकारी न देने और आयोग को जवाब न देने पर कार्रवाई।

  3. जुर्माना ₹8,000, एक माह में जमा न करने पर वेतन/पेंशन से।

जागरण संवाददाता, अनुगुल। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना नहीं देना और बाद में राज्य सूचना आयोग के सवालों का जवाब तक नहीं देना टीएएमडीए के तीन पूर्व सूचना अधिकारियों को भारी पड़ गया। राज्य सूचना आयुक्त प्रणबिंदु आचार्य ने नीलिमा मोहपात्रा, रमेश चंद्र साहू और मनोज कुमार सिंह पर कुल 8,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। 


तीनों को एक माह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का आदेश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर वेतन और पेंशन से दो किस्तों में राशि वसूल की जाएगी। मामला अनुगुल शहर के राजकिशोरपाड़ा निवासी सुशांत कुमार नंदा की आरटीआई याचिका से जुड़ा है। नंदा ने 13 फरवरी 2024 को टीएएमडीए में आवेदन कर तुरंग स्थित जिधल विहार में उनकी पत्नी के नाम दर्ज मकान से संबंधित कुछ सूचनाएं मांगी थीं। 


निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद मांगी गई सूचना नहीं मिली

निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद उन्हें मांगी गई सूचना नहीं मिली। इसके बाद नंदा ने अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की। यहां भी उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं मिला और यह कहते हुए अपील खारिज कर दी गई कि संबंधित दस्तावेज की फाइल उपलब्ध नहीं है। 


सूचना पाने की कोशिश में नंदा ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने सुनवाई के दौरान फाइल गायब होने पर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने और सूचना नहीं देने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किए जाने का लिखित कारण मांगा। बावजूद इसके संबंधित अधिकारियों की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं दिया गया। 


आयोग ने इसे आरटीआई कानून के तहत अधिकारियों की लापरवाही और कर्तव्य निर्वहन में चूक मानते हुए जुर्माना लगाया। आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता भूपेश चंद्र प्रधान ने पैरवी की।