पत्नी के जमीन विवाद में खुद ही बन गए ‘जज’! फैसला सुनाने वाले ओडिशा के अतिरिक्त आयुक्त विवादों में घिरे
भुवनेश्वर के अतिरिक्त आयुक्त प्रदीप्त कुमार नायक अपनी पत्नी से जुड़े भूमि विवाद मामले की सुनवाई कर आदेश पारित करने के आरोप में घिर गए हैं।

पत्नी के जमीन विवाद में खुद ही बन गए जज (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
अतिरिक्त आयुक्त ने पत्नी के भूमि विवाद की सुनवाई की।
सरकारी नियमों का उल्लंघन, निष्पक्षता पर उठे सवाल।
राजस्व परिषद ने मामले की जांच के आदेश दिए।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। अपने ही परिवार से जुड़े भूमि विवाद मामले की सुनवाई कर आदेश पारित करने के आरोप में भुवनेश्वर के चौथे अतिरिक्त रिविजनल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी एवं अतिरिक्त आयुक्त प्रदीप्त कुमार नायक विवादों में घिर गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व परिषद ने शिकायत की जांच के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, बार एसोसिएशन के कुछ अधिवक्ताओं ने राजस्व परिषद के सदस्य के पास लिखित शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि प्रदीप्त कुमार नायक ने अपनी पत्नी एवं प्रशासनिक अधिकारी स्वयंप्रभा महांति से जुड़े भूमि विवाद मामले की सुनवाई स्वयं की। जबकि सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी को अपने परिवार से जुड़े मामले की सुनवाई करने की अनुमति नहीं है।
भुवनेश्वर रिविजनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
शिकायत में कहा गया है कि भुवनेश्वर तहसील के अंधारुआ मौजा में कृष्ण भोई से स्वयंप्रभा महांति ने वर्ष 2004 में जमीन खरीदी थी। बाद में उसी जमीन को रेणुबाला पाणिग्राही ने भी खरीदा। बाद में तैयार नक्शे में भूमि का क्षेत्रफल कम दर्शाए जाने पर रेणुबाला पाणिग्राही ने संशोधन की मांग करते हुए भुवनेश्वर रिविजनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में स्वयंप्रभा महांति समेत अन्य खरीदारों, मूल विक्रेता, तहसीलदार और बंदोबस्त कार्यालय को पक्षकार बनाया गया था। आरोप है कि मामले की सुनवाई करते हुए प्रदीप्त कुमार नायक ने तहसीलदार को नक्शे में संशोधन करने का निर्देश दे दिया।
विवाद का केंद्र फैसला नहीं, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया
अधिवक्ताओं का कहना है कि विवाद का केंद्र फैसला नहीं, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया है। उनका तर्क है कि जब किसी मामले में अधिकारी का परिवार प्रत्यक्ष रूप से पक्षकार हो, तब उस अधिकारी द्वारा मामले की सुनवाई करना निष्पक्ष न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
उधर, राजस्व परिषद के सचिव लक्ष्मीकांत सेठी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और आरोपों की सत्यता की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहते हैं नियम
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक मामले में यदि अधिकारी का परिवार पक्षकार हो तो संबंधित अधिकारी को उस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। इसी नियम के कथित उल्लंघन को लेकर अब प्रदीप्त कुमार नायक सवालों के घेरे में हैं।
