ऑटिज्म पीड़ित बेटे के लिए इस्तीफा देने वाली महिला जज को ओडिशा हाई कोर्ट से राहत, दोबारा मिलेगी नौकरी
न्यायाधीश इप्सिता मोहंती ने ऑटिज्म पीड़ित बेटे के इलाज के लिए नौकरी से इस्तीफा दिया था, जिसे बाद में वापस ले लिया।

ओडिशा हाई कोर्ट।
HighLights
न्यायाधीश इप्सिता मोहंती ने ऑटिज्म पीड़ित बेटे के इलाज हेतु इस्तीफा दिया।
राज्य सरकार ने इस्तीफा स्वीकार किया, जबकि न्यायाधीश ने वापस ले लिया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश रद कर पुनः नियुक्ति का निर्देश दिया।
संवाद सहयोगी, कटक। ऑटिज्म (शारीरिक एवं मानसिक विकास) संबंधित समस्या में पीड़ित अपने बेटे की इलाज के लिए एक महिला न्यायधीश ने नौकरी से इस्तीफा दिया था। लेकिन बाद में वह अपना इस्तीफा पत्र वापस ले ली थीं।
लेकिन राज्य सरकार उनके इस्तीफा पत्र को स्वीकार कर उन्हें नौकरी से मुक्त कर दिया था। जिसको चुनौती देते हुए वह महिला न्यायाधीश इप्सिता मोहंती हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी।
हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस मानस रंजन पाठक और न्यायाधीश जस्टिस और शिव शंकर मिश्र को लेकर गठित खंडपीठ राज्य सरकार के उसे आदेश को रद करने के साथ-साथ आवेदनकारी को दोबारा यानी पुनः नियुक्ति के लिए निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार, महंती जितने समय तक नौकरी में नहीं थी, उस समय की कोई भी तनख्वाह प्राप्त नहीं करेंगी। लेकिन नौकरी समय की अवधि को पेंशन और तरक्की के लिए स्वीकार किया जा सकेगा।
यह बात हाई कोर्ट के खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है। आवेदनकारी इप्सिता मोहंती वर्ष 2022 जुलाई महीने में ढेंकनाल जिला हिंदोल में अतिरिक्त सिविल जज (जूनियर डिवीजन) तथा सब डिविजनल जुडिशल मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) पद को तबादला हुई थी।
ऑटिज्म से पीड़ित अपने बेटे की अधिक इलाज की जरूरत पड़ने पर भुवनेश्वर रहने के लिए वह हाई कोर्ट को अनुरोध किया था।
उनके आवेदन के ऊपर वर्ष 2022 अक्टूबर में स्टैंडिंग कमेटी द्वारा विचार के लिए स्वीकार किया गया था। लेकिन बाद में इसकी अंतिम निर्णय के संबंध में आवेदनकारी को अवगत नहीं किया गया था। जिसके चलते आवेदनकारी 29 नवंबर वर्ष 2022 को नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।
20 दिसंबर 2022 को हाई कोर्ट के फुल कोर्ट उनकी इस्तीफा को स्वीकार कर राज्य सरकार की अनुमोदन के लिए भेज दिया था।
लेकिन आवेदनकारी ठीक उसके अगले दिन यानी 21 दिसंबर को अपना इस्तीफा पत्र वापस ले ली थी। उनकी इस्तीफा पत्र वापस लेने की बात को हाईकोर्ट ने उसी दिन स्वीकार कर लिया था।
लेकिन हाई कोर्ट के फुल कोर्ट की निर्णय को राज्यपाल अनुमोदन से पहले आवेदनकारी की इस्तीफ़ा वापस लेने के संबंध में राज्य सरकार और राज्यपाल अवगत नहीं थे। जिसके चलते राज्य सरकार की ओर से 2 जनवरी वर्ष 2023 को इस्तीफा पत्र को स्वीकार किया गया था और राज्य सरकार आवेदनकारी को 3 जनवरी वर्ष 2023 को नौकरी से मुक्त कर दिया था।
हाई कोर्ट के मुताबिक, आवेदनकारी सटीक समय पर अपनाया इस्तीफा पत्र वापस ले ली थी। इसलिए कानून की दृष्टि से उनका इस्तीफा पत्र स्वीकार योग्य नहीं है। आवेदनकारी ने किसी भी तरह की गलती नहीं किया है। यह बात हाई कोर्ट अपने राय में स्पष्ट किया है और उसी के आधार पर राज्य सरकार के निर्णय को रद कर दिया है।
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