पश्चिमी ओडिशा की 'लाइफलाइन' पर संकट: शंख नदी का जलस्तर हुआ शून्य, पानी के लिए गड्ढे खोदने को मजबूर ग्रामीण
पश्चिमी ओडिशा में भीषण गर्मी के कारण शंख नदी पूरी तरह सूख गई है, जिससे सुंदरगढ़ जिले के दो दर्जन से अधिक गांवों में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। ...और पढ़ें

शंख नदी का जलस्तर हुआ शून्य

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जागरण संवाददाता, राउरकेला। पूरे पश्चिमी ओडिशा में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। इसका असर सुंदरगढ़ जिले की नदियों और नालों पर भी पड़ा है। जिले की प्रमुख नदियों में से एक शंख नदी का पानी सूख चुका है। इसके कारण नदी के दोनों किनारों पर बसे कुतरा और कुआरमुंडा ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग पानी के लिए भारी संकट उत्पन्न होने लगा है।
पिछले वर्षों में कभी ऐसी भयावह स्थिति नहीं देखी गई थी। शंख नदी सुंदरगढ़ जिले के कुतरा, कुआरमुंडा, लाठीकटा ब्लॉक तथा राउरकेला के लोगों की जीवन रेखा है। इस नदी पर मंदिरा में बांध बनाकर राउरकेला इस्पात संयंत्र और शहरवासियों को पानी उपलब्ध कराया जाता है।
तरकेरा, उडरुमा, साधामुंडा, लक्ष्मीपोष और दलिक आदि गांव पूरी तरह इसी नदी के पानी पर निर्भर हैं। यह नदी साल भर खेती से लेकर अन्य उपयोगों के लिए जल उपलब्ध कराती है। लेकिन अब यह नदी पूरी तरह सूख चुकी है। ऊपर की ओर झारखंड से भी अब पानी का प्रवाह नहीं आ रहा है।
नहाने के लिए भी मुश्किल से मिल रहा पानी
वर्तमान में नदी सूख जाने के कारण लोगों को नहाने के लिए भी पानी मुश्किल से मिल रहा है। लोग नदी के विभिन्न स्थानों पर छोटे-छोटे गड्ढे खोदकर किसी तरह पानी का उपयोग कर रहे हैं और जीवन यापन कर रहे हैं। दूसरी ओर, नदी किनारे के गांवों में कुओं और नलकूपों का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है।
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हालांकि मंदिरा डैम में पानी होने के कारण राउरकेला को जल आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है। लेकिन यदि इस बार पर्याप्त मात्रा में मानसून वर्षा नहीं हुई, तो मंधिरा डैम में जलस्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकता है। इससे राउरकेला शहर में भी गंभीर जल संकट उत्पन्न होने की आशंका है।
झारखंड के गुमला जिले से निकलती है नदी
उल्लेखनीय है कि शंख नदी झारखंड के गुमला जिले के लुपुंगपाट से निकलती है। वहां से लगभग 65 किलोमीटर बहने के बाद यह छत्तीसगढ़ में प्रवेश करती है और करीब 50 किलोमीटर बहने के बाद फिर झारखंड में लौट आती है। इसके बाद 78 किलोमीटर आगे बढ़कर यह ओडिशा की सीमा में प्रवेश करती है।
आगे 54 किलोमीटर बहने के बाद राउरकेला के वेदव्यास में कोएल नदी से मिलती है। इन दोनों नदियों के संगम से ब्राह्मणी नदी का निर्माण होता है। ऐसी प्रमुख नदी का जलस्तर इस तरह गिरना पर्यावरण और जनजीवन के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।