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SI परीक्षा-2024 पेपर लीक मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, ओडिशा और बंगाल के 12 ठिकानों पर छापेमारी

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 15 Oct 2026 12:26 AM (GMT+05:30)Updated: Thu, 15 Oct 2026 02:13 AM (GMT+05:30)

प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2024 पेपर लीक मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. ED ने ओडिशा SI पेपर लीक में 12 ठिकानों पर छापेमारी की।

  2. अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए।

  3. यह मामला संगठित मनी लॉन्ड्रिंग और भर्ती धांधली से जुड़ा है।

डिजिटल डेस्क, भुवनेश्वर। प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2024 के पेपर लीक मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर हाल ही में छापेमारी की। 9 से 12 अक्टूबर के बीच हुई इस कार्रवाई में ED ने कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

यह पूरा मामला अक्टूबर 2025 का है, जब ओडिशा पुलिस ने 30 सितंबर को इच्छापुरम के पास 3 बसों को रोककर 114 अभ्यर्थियों को पकड़ा था। जांच में पता चला कि 5 और 6 अक्टूबर 2025 को होने वाली परीक्षा का लीक पेपर देने के नाम पर हर उम्मीदवार से 15 लाख से 30 लाख तक वसूले जा रहे थे। पुलिस एफआईआर के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया था और अब इसमें मनी लॉन्ड्रिंग की जांच ED कर रही है।

संगठित तरीके से पेपर लीक कराने का आरोप

ED की जांच में इस धांधली के कई चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी ITI लिमिटेड को दी थी, जिसने आगे यह काम भुवनेश्वर की सिलिकॉन टेकलैब (STPL) को सौंपा। लेकिन STPL के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने बिना किसी अनुमति के परीक्षा का गोपनीय काम पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी के निदेशक शंकर पृस्टी को सौंप दिया। इसके बाद इन कंपनियों से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों को लालच देकर पैसे बटोरे और संगठित तरीके से पेपर लीक कराया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि परीक्षा से पहले ही आरोपी शंकर पृस्टी और STPL के बीच संदिग्ध पैसों का लेनदेन चल रहा था। इसके अलावा PSIL इंटरनेशनल के मालिकों (समीर रथ और उनकी पत्नी शाश्वती मिश्रा) ने 2023 में STPL में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी थी, लेकिन इसकी जानकारी कंपनी रजिस्ट्रार को कभी नहीं दी गई।

मालिकाना हक बदलने के बावजूद सुरेश चंद्र नायक ही बिना किसी अधिकार के परीक्षा का सारा काम संभाल रहा था और उसी ने गुप्त तरीके से प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई। ED के अनुसार, इस संगठित घोटाले से करोड़ों का काला धन जुटाया गया है और इसमें भर्ती बोर्ड व अन्य कंपनियों के कुछ और लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।