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    पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा: सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी पहंडी, शाम 4 बजे से प्रारंभ होगी रथ खींचने की प्रक्रिया

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा गुरुवार को पारंपरिक वैभव और धार्मिक उल्लास के साथ शुरू होगी, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। मंदिर प्रशासन ने ...और पढ़ें

    महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक 'पाहंडी' सुबह 9:30 बजे शुरू होगी।

    महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक 'पाहंडी' सुबह 9:30 बजे शुरू होगी।

    HighLights

    1. गुरुवार को पारंपरिक वैभव से शुरू होगी रथयात्रा।

    2. पाहंडी सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक।

    3. रथ खींचना शाम 4 बजे से होगा आरंभ।

    जागरण संवाददाता, अनुगुल। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा गुरुवार को पारंपरिक वैभव और धार्मिक उल्लास के बीच शुरू होगी। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने रथयात्रा का विस्तृत अनुष्ठान कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके अनुसार, महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक 'पाहंडी' सुबह 9:30 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी, जबकि तीनों रथों का खींचना शाम 4 बजे से आरंभ होगा।

    रथयात्रा के लिए पुरी पूरी तरह तैयार है। प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिन की शुरुआत सुबह 6 बजे मंगल आरती से होगी।

    गोपाल बल्लव एवं सकाल धूप (खिचड़ी भोग) अर्पित होगा

    इसके बाद मैलम, तड़प लागी, रोष होम, अबकाश, सूर्य पूजा और द्वारपाल पूजा सहित सभी पारंपरिक नीतियां निर्धारित समय पर संपन्न होंगी। सुबह 8 से 9 बजे के बीच गोपाल बल्लव एवं सकाल धूप (खिचड़ी भोग) अर्पित किया जाएगा, जबकि सुबह 9 बजे रथ प्रतिष्ठा होगी। इसके बाद पाहंडी के दौरान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गर्भगृह से भव्य शोभायात्रा के साथ उनके-अपने रथों तक लाया जाएगा।

    यह रथयात्रा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक अनुष्ठान माना जाता है। दोपहर में मदनमोहन बीजे, चितालागी, बेसा शेष जैसी नीतियां पूरी होने के बाद दोपहर 2 से 3 बजे तक 'छेरा पहनरा' अनुष्ठान होगा। इस परंपरा के तहत पुरी के गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से तीनों रथों की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा इस संदेश का प्रतीक है कि महाप्रभु के समक्ष राजा और प्रजा सभी समान हैं।

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    शाम 4 बजे श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक तीनों रथों की यात्रा शुरू होगी

    इसके बाद चारा फिता और घोड़ा-सारथी लागी की रस्में पूरी होने पर शाम 4 बजे श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक तीनों रथों की यात्रा शुरू होगी। रथयात्रा को लेकर राज्य सरकार, श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और पुरी जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे रथमार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, एआई आधारित निगरानी, ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा शिविर, आपातकालीन सेवाएं और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सके।

    रथयात्रा के प्रमुख कार्यक्रम सुबह 6:00 बजे – मंगल आरती सुबह 9:00 बजे – रथ प्रतिष्ठा सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे – पाहंडी दोपहर 2:00 से 3:00 बजे – छेरा पहंरा शाम 4:00 बजे – तीनों रथों का खींचना शुरू आस्था, परंपरा और संस्कृति के इस महापर्व पर एक बार फिर पुरी 'श्रीक्षेत्र' से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने जा रही है, जहां महाप्रभु स्वयं भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।

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