पुरी रथयात्रा में झमाझम बारिश: छाते और रेनकोट की भारी मांग, कुछ ही घंटों में हुआ 5 करोड़ का कारोबार
विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इस बार बारिश का अनोखा संगम देखने को मिला, जिससे श्रद्धालुओं को गर्मी की बजाय पानी से बचाव की चिंता सताती ...और पढ़ें

HighLights
रथयात्रा में बारिश ने बदला मौसम का मिजाज।
श्रद्धालुओं ने छाते, रेनकोट खरीदकर किया बचाव।
बारिश से बचाव के सामान से 5 करोड़ का कारोबार।
शेषनाथ राय, पुरी। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इस बार श्रद्धा के साथ-साथ बारिश का अनोखा रंग भी देखने को मिला।
महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए प्रदेश ही नहीं, देश-विदेश से सात लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे। लेकिन इस वर्ष रथयात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि भक्तों को गर्मी और उमस से नहीं, बल्कि लगातार हो रही बारिश से बचाव की चिंता सताती रही।
आमतौर पर रथयात्रा के दौरान बड़दांड पर श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से पानी का छिड़काव कराया जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने ऐसा करवट बदला कि श्रद्धालुओं को खुद को पानी से बचाने के लिए छाते, रेनकोट और प्लास्टिक शीट का सहारा लेना पड़ा।
बुधवार से शुरू हुई बारिश के बीच पूरा बड़दांड गुरुवार को रंग-बिरंगे रेनकोट, छातों और प्लास्टिक आवरणों से ढका नजर आया।
बारिश से बचने के साधन खरीदने के लिए जगह-जगह लगी अस्थायी दुकानों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। स्थिति यह रही कि कुछ ही घंटों में कई दुकानों का पूरा स्टॉक समाप्त हो गया। जिन श्रद्धालुओं के पास पहले से कोई व्यवस्था नहीं थी, उनके लिए यही सामान सबसे बड़ा सहारा बना।
व्यापारियों के अनुसार रथयात्रा के दौरान छाते, रेनकोट और प्लास्टिक जरी की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई। अनुमान है कि करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने बारिश से बचाव के लिए इन वस्तुओं की खरीदारी की।
5 करोड़ का कारोबार
इससे शहर में लगभग पांच करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कई दुकानदारों ने बताया कि दोपहर तक उनके पास उपलब्ध अधिकांश सामग्री बिक चुकी थी।
दरअसल, रथयात्रा से एक दिन पहले ही पुरी में झमाझम बारिश शुरू हो गई थी, जो गुरुवार को भी जारी रही। इंद्रदेव की मेहरबानी के चलते मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। यही कारण रहा कि हर वर्ष बड़दांड पर दिखाई देने वाली पानी छिड़काव वाली गाड़ियां इस बार इक्का-दुक्का ही नजर आईं।
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बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। भीगते हुए भी भक्त महाप्रभु के जयघोष के साथ रथों की रस्सियां खींचते रहे। श्रद्धा, भक्ति और बारिश के अद्भुत संगम ने इस वर्ष की रथयात्रा को यादगार बना दिया।