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    मोबाइल की लत से बढ़ रही घरेलू हिंसा, उपमुख्यमंत्री ने ब्रेक लेने की अपील की

    Updated: Wed, 10 Sep 2025 11:32 AM (GMT+05:30)

    मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और इंटरनेट मीडिया रील्स की लत घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी का कारण बन रही है। विशेषज्ञों ने महिला सुरक्षा अधिनियम 20 ...और पढ़ें

    ओडिशा में घरेलू हिंसा बढ़ाने में मोबाइल फोन की लत और सोशल मीडिया का क्रेज बन रहा कारण: उप-मुख्यमंत्री
    ओडिशा में घरेलू हिंसा बढ़ाने में मोबाइल फोन की लत और सोशल मीडिया का क्रेज बन रहा कारण: उप-मुख्यमंत्री

    HighLights

    1. मोबाइल की लत से घरेलू हिंसा में वृद्धि |
    2. रील्स पारिवारिक सामंजस्य बिगाड़ रही उपमुख्यमंत्री |
    3. घरेलू हिंसा पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन |

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और इंटरनेट मीडिया रील्स की लत घरेलू हिंसा मामलों में बढ़ोतरी के बड़े कारण के रूप में सामने आ रहे हैं।इस पर विशेषज्ञों ने महिला सुरक्षा अधिनियम, 2025 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में चेतावनी दी।

    कार्यक्रम में ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिड़ा ने लोगों से मोबाइल का अति प्रयोग न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दीवानगी पारिवारिक सामंजस्य को बिगाड़ रही है।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि रील्स के कारण परिवारों में घरेलू हिंसा के मामले सामने आए हैं।ऐसी लत और इसके दुष्प्रभावों से बचना बेहतर है।जो भी चीज़ हद से ज्यादा हो, वह समाज को नुकसान ही पहुंचाएगी।

    इस दौरान समाजसेवी सोफिया शेख ने भी कहा कि इंटरनेट मीडिया से आय अर्जित करने की चाह और रील्स की लत घर में विवाद का आम कारण बन चुके हैं, जो अक्सर गंभीर घरेलू हिंसा में बदल जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि हमारे पास जो मामले आते हैं, उनमें अधिकांश का कारण इंटरनेट मीडिया और रील्स की लत ही होती है।इससे ससुराल पक्ष के साथ टकराव बढ़ रहा है।इसके अलावा, ज्यादातर रील्स अश्लीलता से जुड़े होते हैं, जो परिवार टूटने का मुख्य कारण बन रहे हैं।

    लोक सेवा सम्मेलन हॉल में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारी, चाइल्ड वेलफेयर कमेटियां, वन-स्टॉप सेंटर, स्वैच्छिक संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।प्रतिभागियों ने इस बढ़ते चलन से निपटने और महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के उपायों पर चर्चा की।

    गौरतलब है कि ओडिशा विधानसभा श्वेत पत्र के अनुसार, साल 2024 में 9,731 घरेलू हिंसा के मामले दर्ज किए गए। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पुलिस थानों में महिला एवं बाल डेस्क को और मजबूत करने का निर्देश दिया।उन्होंने आश्वासन दिया कि इन विभागों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाएगा ताकि पीड़िताओं को सही मदद मिल सके।

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    उपमुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि घरेलू हिंसा पर काबू पाना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।