अहमदाबाद में ली ट्रेनिंग, अमेरिका की मां-बेटी की जोड़ी ने विश्व योगासन चैंपियनशिप में रचा इतिहास
35 वर्षीय केमी ने बैक बेंड व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 16 वर्षीय किमानी ने जूनियर आर्टिस्टिक व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। ...और पढ़ें

केमी और किमानी की जोड़ी
HighLights
अमेरिकी जोड़ी ने अपने पेशेवर करियर को बेहतर बनाने के लिए योग अपनाया था
विश्व चैंपियनशिप से पहले अहमदाबाद स्थित साई सेंटर में लिया प्रशिक्षण
35 वर्षीय केमी ने बैक बेंड व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता
खेल संवाददाता, जागरण। अमेरिका की केमी ब्लेक और उनकी बेटी किमानी ब्लेक ने विश्व योगासन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। अहमदाबाद के ईकेए एरिना में आयोजित प्रतियोगिता में 35 वर्षीय केमी ने बैक बेंड व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 16 वर्षीय किमानी ने जूनियर आर्टिस्टिक व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।
विश्व चैंपियनशिप से पहले दोनों ने अहमदाबाद स्थित साई सेंटर में प्रशिक्षण लिया था। पेशेवर करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने योग को अपनाया, जिसने न केवल उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ाई बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान की।
लक्ष्य को पूरा करने के लिए छोड़ना पड़ा शहर
केमी का सपना बचपन से एक सफल कॉन्टॉर्शनिस्ट बनने का था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह न्यूयार्क से लास वेगास गईं और प्रसिद्ध सर्क डू सोले अकादमी में प्रशिक्षण हासिल किया। दूसरी ओर, उनकी बेटी किमानी जिम्नास्टिक सीख चुकी हैं और भविष्य में पेशेवर डांसर बनना चाहती हैं।
भारत के प्रशिक्षकों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
केमी ने बताया कि वह कई वर्षों से योग कर रही हैं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि विश्व योगासन चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी। उन्हें लगता था कि भारतीय खिलाड़ियों के सामने प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए मुश्किल होगा। हालांकि रोमानिया की एक खिलाड़ी और भारत के कुछ प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
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उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उनके अनुसार योग ने जीवन को पूरी तरह बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने केवल शरीर में लचीलापन बढ़ाने के लिए योग करना शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया। योग ने उन्हें अनुशासन, संतुलन और सकारात्मक सोच दी, जिससे उनके जीवन का नजरिया बदल गया।
मां की राह पर बेटी भी
मां को विश्व चैंपियनशिप में भाग लेते देख किमानी ने भी इस सफर का हिस्सा बनने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि योग की शुरुआती शिक्षा उन्हें अपनी मां से मिली थी। हालांकि प्रतियोगिता के लिए उन्होंने केवल तीन सप्ताह पहले गंभीर प्रशिक्षण शुरू किया था।
इसके बावजूद कांस्य पदक जीतना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब यह मां-बेटी की जोड़ी योगासन में और बड़ी सफलताएं हासिल करने तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का नाम रोशन करने का सपना देख रही है।