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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ट्रेनिंग में एक दूसरे की टांग खींचते थे मनु और सरबजोत, कम समय में अभ्यास कर देश को दिलाया मेडल

    Updated: Sun, 25 Aug 2024 08:30 AM (IST)

    सरबजोत सिंह और मनु भाकर की जोड़ी ने पेरिस ओलंपिक-2024 में देश की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाला था। दोनों ने 10 मीयर एयर पिस्टल मिक्सड टीम इवेंट में ये मे ...और पढ़ें

    मनु भाकर और सरबजोत सिंह ने पेरिस ओलंपिक में जीता ब्रॉन्ज मेडल
    मनु भाकर और सरबजोत सिंह ने पेरिस ओलंपिक में जीता ब्रॉन्ज मेडल

    HighLights

    1. पेरिस ओलंपिक में सरबजोत ने मनु के साथ जीता था ब्रॉन्ज मेडल
    2. सरबजोत सिंह का ये पहला ओलंपिक मेडल था
    3. ट्रेनिंग के लिए नहीं मिला था पर्याप्त समय

     पीटीआई, बेंगलुरु: मनु भाकर के साथ मिलकर भारत को 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्सड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक दिलाने वाले सरबजोत सिंह ने कहा कि उन्हें अपनी स्पर्धा से पहले एक साथ ट्रेनिंग करने का बमुश्किल ही मौका मिला था। सरबजोत ने शनिवार को कहा कि मेरी ट्रेनिंग नौ बजे होनी थी और उसकी 12 बजे।

    दोनों की ट्रेनिंग अलग अलग होती थी। सरबजोत ने कहा कि मिक्स्ड ट्रेनिंग सत्र 30 मिनट तक रहा जिसके पहले वह अलग से ट्रेनिंग करती थीं और मैं अलग से। हमारी बातचीत आमतौर पर संक्षिप्त रही जिसमें बातें अपना शत प्रतिशत देना है बस यहीं तक सीमित रहती। कभी-कभी मैं उसका मजाक उड़ाता था तो कभी कभी वह मेरा मजाक उड़ाती थी।

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    युसूफ के मुरीद हैं सरबजोत

    सरबजोत ने तुर्किये के निशोबाज यूसुफ डिकेक के मुरीद हैं। हरियाणा के धीन गांव के 22 वर्षीय सरबजोत ने कहा कि मैं 2011 से उनके वीडियो देख रहा हूं। वह हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। अब वह 51 साल के हैं। मैंने कोशिश की। फिर भी मैं उनके 'परफेक्शन' से मेल नहीं खा सका। अगर मुझे मौका मिलता तो मैं उनसे पूछता कि वह क्या खाते हैं?

    पिस्टल पर लिखा है खास नाम

    सरबजोत ने कहा कि उनकी पिस्टल पर एस सिंह30 लिखा हुआ है, जिसमें उनके नाम के पहले अक्षर और उनकी यात्रा की एक महत्वपूर्ण तारीख शामिल है। उन्होंने कहा, जब मैंने हांगझू में 2022 एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया तो मैंने अपनी पिस्टल पर यह लिखवाया। यह मेरी सबसे अच्छी पिस्टल है क्योंकि मेरा पदक (स्वर्ण) 30 सितंबर को आया था और यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।

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