'देखते हैं 3 महीने भी टिक पाती है या नहीं...', विजय की नई सरकार पर स्टालिन का खुला चैलेंज
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके की बड़ी जीत के बाद डीएमके नेता एमके स्टालिन ने नई सरकार पर तंज कसा है। ...और पढ़ें

स्टालिन ने विजय सरकार को "ग्लैमर सुनामी" बताया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) की बड़ी जीत पर डीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रतिक्रिया दी है। स्टालिन ने इसे "ग्लैमर सुनामी" बताया।
स्टालिन का नया हमला
डीएमके मुख्यालय में जिलाध्यक्षों की बैठक में स्टालिन ने कहा कि राज्य के कल्याणकारी कामों पर अब दूसरी सुनामी आ गई है। उन्होंने नए मुख्यमंत्री विजय पर तंज कसते हुए यह बात कही।
"ये हार नहीं, चक्र है"
स्टालिन ने अपनी पार्टी की बुरी हार को हार नहीं माना। उन्होंने कहा, "ये हार नहीं बल्कि एक चक्र है।" उन्होंने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि जनता क्या चाहती है, इसे समझकर पार्टी में बड़े बदलाव किए जाएंगे।
सोशल मीडिया पर फोकस
स्टालिन ने कहा कि पार्टी अब अपनी रणनीति बदलेंगी और सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप) पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर अब से मैदान में काम शुरू करें तो अगला चुनाव जीता जा सकता है।
रिपोर्ट और वेबसाइट बनाई
- स्टालिन ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से बात करने के लिए एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी 20 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।
- कार्यकर्ता जो काम नहीं करना चाहते, वे हट सकते हैं।
- पार्टी के लिए नई वेबसाइट "UDANPIRAPPINKURAL" शुरू की गई है, जहां आम लोग और कार्यकर्ता अपनी सुझाव और शिकायतें दे सकते हैं।
स्टालिन ने वीडियो में कहा, "पार्टी के हर स्तर पर बदलाव होंगे।"
चुनाव के आंकड़े
- 2021 में डीएमके गठबंधन ने 159 सीटें जीती थीं।
- इस बार गठबंधन को सिर्फ 74 सीटें मिलीं, जबकि डीएमके अकेले 59 सीटों पर सिमट गई।
- विजय की पार्टी टीवीके ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 108 सीटें जीत लीं। इससे 59 साल पुरानी द्रविड़ पार्टियों की द्विपक्षीय सत्ता (Dravidian duopoly) टूट गई।
- इस बार मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड 85.1% रहा, जो 2021 के 72.7% से काफी ज्यादा है।
स्टालिन को भी झटका
डीएमके की परंपरागत मजबूत सीट चेन्नई में भी पार्टी बुरी तरह हारी। खुद एमके स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट हार गए, जो उन्होंने लगातार तीन बार जीती थी। कांग्रेस ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन सिर्फ 5 सीटें जीतीं। एआईएडीएमके सिर्फ 47 सीटों पर सिमट गई।
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आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषक इसे द्रविड़ पार्टियों (डीएमके और एआईएडीएमके) के लिए अस्तित्व का संकट मान रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि विजय अब लंबे समय तक सत्ता में रह सकते हैं, जैसे पहले एमजीआर रहे थे।
डीएमके के संगठन महासचिव आरएस भारती ने कहा, "हम सबक ले रहे हैं और सोशल मीडिया को मजबूत करेंगे।" स्टालिन ने विजय सरकार को लेकर कहा कि देखते हैं यह सरकार तीन महीने भी टिक पाती है या नहीं। अभी देखना बाकी है कि डीएमके इन बदलावों के साथ कितनी जल्दी वापसी कर पाती है।