'जंग का मैदान नहीं, दक्षिण एशिया का गेटवे बने जम्मू-कश्मीर', महबूबा ने पाक-चीन से रिश्ते सुधारने का दिया फॉर्मूला
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर को दक्षिण और मध्य एशिया के बीच प्रवेशद्वार बनाने ...और पढ़ें

महबूबा बोलीं, J&K से खुले लद्दाख-यारकंद-खोतान के रास्ते।
HighLights
जम्मू-कश्मीर को दक्षिण-मध्य एशिया का प्रवेशद्वार बनाने की मांग।
भारत-पाकिस्तान के बीच शांति का पुल बने J&K।
सार्क को पुनर्जीवित कर J&K में निवेश आकर्षित करें।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि जम्मू-कश्मीर को दक्षिण और मध्य एशिया के बीच एक प्रवेशद्वार बनाया जाए और इसकी भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल पाकिस्तान और चीन के साथ संबंध मजबूत करने के लिए किया जाए।
यहां पत्रकारों से बातचीत में महबूबा ने कहा, 'दुनिया में हालात बदल रहे हैं। आपने देखा कि ईरान जैसे छोटे देश ने अपनी रणनीतिक स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल कर अमेरिका जैसी महाशक्ति को झुका दिया। जम्मू-कश्मीर की भी एक रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के संघर्ष में उलझा हुआ है, जिससे लोगों को तकलीफ झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा, 'इसे युद्ध का मैदान बनाने के बजाय भारत और पाकिस्तान के बीच शांति का पुल बनाया जाना चाहिए। सड़कें खुलनी चाहिए, दोनों देशों के बीच आवाजाही हो।' उन्होंने बातचीत के पक्ष में आए हालिया आरएसएस के बयानों का भी स्वागत किया।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन, 'दोस्त बदले जा सकते हैं, पड़ोसी नहीं', का हवाला देते हुए महबूबा ने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री की विरासत इस बात से नहीं तय होती कि वह कितना शक्तिशाली था या कितने साल शासन किया, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसने कितने संघर्ष सुलझाए। 'आज दोनों देशों के पास सुनहरा मौका है। शाहबाज शरीफ के साथ सेना एक पेज पर है। हमारे देश में मोदी जी बेहद ताकतवर हैं। यह दोनों के लिए सुनहरा अवसर है।'
सार्क को पुनर्जीवित करने की मांग
पीडीपी प्रमुख ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, सार्क को फिर से शुरू करने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को सार्क का नेतृत्व अपने हाथ में लेना चाहिए और जम्मू-कश्मीर को सार्क इस मायने में प्रयोग करना चाहिए जिससे सभी देश यहां निवेश करें।
लद्दाख के रास्ते खोतान, यारकंद या काशगर को खोलने का सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'जब लिपुलेख रोड, उत्तराखंड को भारत-तिब्बत सीमा पर लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाला 80 किलोमीटर का हिमालयी गलियारा खुल सकता है, तो लद्दाख के रास्ते ये रास्ते क्यों नहीं खुल सकते?'
महबूबा ने कहा, 'अगर जम्मू-कश्मीर की रणनीतिक स्थिति से हम मध्य एशिया और दक्षिण एशिया का प्रवेशद्वार बनते हैं, तो यहां के पूरे हालात बदल जाएंगे। इससे पूरे देश को फायदा होगा। इसके लिए पाकिस्तान और चीन से अच्छे संबंध जरूरी हैं।'
धारा 370 हटने के बाद भी अलगाव बरकरार
2019 में केंद्र द्वारा अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ “सबसे खतरनाक हथियार” इस्तेमाल किया, फिर भी 'कुछ हासिल नहीं हुआ'।
' उन्होंने आरोप लगाया कि अब भी अलगाव है। आपने इसे खुली जेल बना दिया है। यहां बोलने की आजादी नहीं है, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आजादी नहीं है। आप बस रोजमर्रा के हिसाब से इसे संभाल रहे हैं।
महबूबा ने कहा कि पहले भारत का टकराव सिर्फ पाकिस्तान से था, लेकिन 2019 के बाद चीन ने भी लद्दाख में 'काफी जमीन पर कब्जा' कर लिया है।'तो बातचीत करके महानता की मिसाल क्यों न पेश की जाए? मोदी जी को पाकिस्तान और चीन के साथ हमारे संबंध सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। और इसमें जम्मू-कश्मीर बहुत अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यहां से रास्ते गुजरते हैं।'
पाकिस्तान की तर्ज पर रणनीतिक लाभ उठाने की सलाह
उन्होंने कहा, 'अगर आपके पास ऐसा फॉर्मूला है जिससे हमारे देश या पाकिस्तान की संप्रभुता कमजोर न हो, तो हम वह क्यों नहीं कर रहे? अब पुरानी दुनिया नहीं रही, दुनिया बदल गई है। हमें अपनी रणनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे पाकिस्तान ने किया।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय पाकिस्तान दुनिया के केंद्र में है क्योंकि उसके पास रणनीतिक स्थिति है। कहा जा रहा है कि उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध रुकवाया। उन्होंने सवाल उठाया कि हमारे पास भी जम्मू-कश्मीर में ऐसी ही अच्छी रणनीतिक स्थिति है, जो दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ सकती है। हम इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते?
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