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पंजाब: बाबा बकाला साहिब में रक्खड़ पुन्नेया मेले की धूम, गुरुद्वारा साहिब रोशनियों से जगमगाया; देखें Photos

By Vipin Singh RanaEdited By: Prince Sharma
Updated: Fri, 28 Aug 2026 09:25 AM (IST)

बाबा बकाला साहिब में 'साचा गुरु लाधो रे दिवस' और रक्खड़ पुन्नेया मेले के लिए गुरुद्वारा साहिब को भव्य रूप से सजाया गया है।

पंजाब: बाबा बकाला साहिब में रक्खड़ पुन्नेया मेले की धूम (फाइल फोटो)

पंजाब: बाबा बकाला साहिब में रक्खड़ पुन्नेया मेले की धूम (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गुरुद्वारा साहिब को रंग-बिरंगी रोशनियों से भव्य सजाया गया

  2. नौवीं पातशाही गुरु तेग बहादर जी की पावन तपस्थली है

  3. मेले में धार्मिक आस्था और राजनीतिक कांफ्रेंस का संगम

विपिन कुमार राणा, अमृतसर। नौवीं पातशाही श्री गुरु तेग बहादर जी की पावन तपस्थली बाबा बकाला साहिब इन दिनों धार्मिक आस्था के रंग में रंगी हुई है। ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को रंग-बिरंगी रोशनियों से भव्य रूप से सजाया गया है। रात होते ही रोशनियों से नहाया गुरुद्वारा साहिब श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। साचा गुरु लाधो रे दिवस और रक्खड़ पुन्नेया के ऐतिहासिक मेले को लेकर कस्बे में श्रद्धालुओं की आमद हुई पड़ी है।

बाबा बकाला साहिब में हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर तीन दिवसीय मेला लगता है। मेले में पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मेले के दौरान पूरा बाबा बकाला साहिब धार्मिक रंग में रंगा नजर आता है।

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26 वर्ष 9 महीने 13 दिन भोरे में की तपस्या

बाबा बकाला साहिब का इतिहास नौवीं पातशाही श्री गुरु तेग बहादर जी से से जुड़ा हुआ है। धार्मिक इतिहास के अनुसार श्री गुरु तेग बहादर जी ने यहां एक भोरे के अंदर रहकर लंबे समय तक तपस्या की थी।

उन्होंने यहां 26 वर्ष, 9 महीने और 13 दिन तपस्या की। इसी कारण बाबा बकाला साहिब सिख धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। गुरु साहिब की तपस्थली होने के कारण यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन साचा गुरु लाधो रे दिवस और रक्खड पुन्नेया के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। संगत गुरु घर में नतमस्तक होकर अरदास करती है और गुरबाणी का श्रवण करती है।

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तीन दिन तक चलता है ऐतिहासिक मेला

रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा बकाला साहिब में लगने वाला मेला तीन दिन तक चलता है। रक्षाबंधन से एक दिन पहले मेले की शुरुआत होती है और एक दिन बाद तक धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं।

इस दौरान गुरुद्वारा साहिब में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दूर-दराज से आने वाली संगत के लिए विभिन्न स्थानों पर लंगर और छबील भी लगाए जाते हैं। मेले के चलते बाबा बकाला साहिब और आसपास के क्षेत्र में बाजार भी सज गए हैं। दुकानों पर धार्मिक सामग्री, खिलौने, खान-पान और अन्य सामान की स्टालें लगाई गई हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग में मेले को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।

राखड़ पुन्निया पर दिखेगा सियासी रंग

बाबा बकाला साहिब का राखड़ पुन्निया मेला धार्मिक महत्व के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। रक्षा बंधन वाले दिन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से यहां राजनीतिक कांफ्रेंस आयोजित की जाती हैं।

इन कांफ्रेंसों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेता पहुंचकर अपने-अपने दल की नीतियों और उपलब्धियों को जनता के सामने रखते हैं। इस बार भी विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से कांफ्रेंसों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मेले में जहां एक तरफ गुरु घर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ेगा, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक मंचों से नेताओं के भाषणों के कारण बाबा बकाला साहिब में सियासी माहौल भी गरमाएगा।

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आस्था के साथ परंपरा और भाईचारे का संदेश

बाबा बकाला साहिब का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक भी है। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली संगत यहां एक साथ गुरु घर में माथा टेकती है। मेले के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सेवा, लंगर और भाईचारे की भावना भी देखने को मिलती है।

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रक्खड़ पुन्नेया के अवसर पर बाबा बकाला साहिब में एक तरफ गुरु तेग बहादर जी की तपस्थली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगेंगी, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए मंच सजाएंगे। इस तरह आने वाले दिनों में बाबा बकाला साहिब में आस्था, इतिहास, परंपरा और सियासत—चारों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।