अमृतसर में किसानों और पुलिस में झड़प, लाठी लगने से ACP घायल; हिरासत में 35 लोग
अमृतसर में अपनी मांगों को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय जा रहे किसानों को पुलिस ने रोका। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ किसान घा ...और पढ़ें

अमृतसर में किसानों और पुलिस में झड़प। फोटो जागरण
HighLights
अमृतसर में किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प।
लाठीचार्ज में एसीपी शिवदर्शन सिंह और कई किसान घायल।
पुलिस ने लगभग 35 किसानों को हिरासत में लिया।
संवाद सहयोगी, अमृतसर। अपनी मांगों को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इस झड़प और पुलिस लाठीचार्ज में कुछ किसान घायल हो गए।
पुलिस ने करीब 35 किसानों को हिरासत में लिया है। झड़प में लाठी लगने से एसीपी शिवदर्शन सिंह घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। समाचार लिखे जाने तक गांव महाला के पुल पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का दावा है कि वह अपनी मांगें शांतिपूर्ण ढंग से रखने आए थे, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिससे कई किसान घायल हो गए।
पंधेर ने कहा कि उनका घेराव करने या झड़प करने का कोई इरादा नहीं था। वह डीसी और सीपी को ज्ञापन सौंपकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका समझौते, बिजली संशोधन विधेयक, श्रम संहिता और बीज अधिनियम को रद करना शामिल है।
इसके साथ ही, उन्होंने इन मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
पंधेर ने कहा कि रामतीर्थ रोड पर हुई झड़प के दौरान चार किसान घायल हो गए और एसीपी शिव दर्शन सहित कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। उनका दावा है कि लाठीचार्ज की शुरुआत पुलिस ने की थी, जिससे अचानक अफरातफरी मच गई।
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इसके बावजूद, किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। किसान नेताओं के अनुसार, पुलिस ने लगभग 10 किलोमीटर के इलाके की घेराबंदी कर दी है और करीब 35 किसानों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें एक बुजुर्ग महिला भी है।
किसानों ने अपने गिरफ्तार साथियों की तत्काल रिहाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सड़क जाम नहीं करेंगे और बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।