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    एसजीपीसी का 1487 करोड़ से अधिक का बजट पास; धर्म प्रचार, शिक्षा और सेवा पर रहा विशेष ध्यान

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 03:04 PM (GMT+05:30)

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने 1487.41 करोड़ रुपये का बजट सर्वसम्मति से पास किया। बजट में धर्म प्रचार, शिक्षा, सेवा कार्यों और श्रद्धालुओं की सुव ...और पढ़ें

    एसजीपीसी की तरफ से बुलाया गया जनरल बजट सत्र।

    एसजीपीसी की तरफ से बुलाया गया जनरल बजट सत्र।

    HighLights

    1. SGPC ने 2026-27 के लिए 1487.41 करोड़ रुपये का बजट पास किया।

    2. धर्म प्रचार, शिक्षा और सेवा कार्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

    3. बजट पर बहस न होने पर एक सदस्य ने विरोध जताया।

    जागरण संवाददाता, अमृतसर।  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1487.41 करोड़ रुपये का बजट जयकारों की गूंज के बीच पास कर दिया। तेजा सिंह समुंदरी हाल में आयोजित जनरल इजलास के दौरान इस बजट पर विस्तार से चर्चा की गई और अंत में सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी गई।

    कमेटी के जनरल सेक्रेटरी शेर सिंह मंडवाला ने बजट पेश करते हुए बताया कि इस बार का बजट पिछले वर्ष की तुलना में 100.94 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि कुल बजट में 7.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कमेटी की गतिविधियों के विस्तार और बढ़ती जरूरतों को दर्शाता है। बजट में धर्म प्रचार, शिक्षा और सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

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    श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर

    गुरुद्वारों के प्रबंधन को और बेहतर बनाने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत विभिन्न गुरुद्वारों के आसपास सरायों के निर्माण और विस्तार, लंगर व्यवस्था को मजबूत करने तथा धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजनाएं शामिल हैं।

    इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कमेटी द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों में सुविधाओं के विस्तार, शिक्षण स्तर को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने के लिए बजट में अलग से प्रावधान रखा गया है।

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    बजट में बहस ना होने पर विरोध

    अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बजट इजलास के दौरान बहस न करवाए जाने को लेकर विवाद सामने आया। इजलास के बीच सदस्य बलविंदर सिंह बैंस ने विरोध जताते हुए सभा छोड़ दी। बाहर आकर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुली चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए। बैंस ने कहा कि संगत के हित में हर प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श जरूरी है, ताकि फैसले संतुलित और जिम्मेदार तरीके से लिए जा सकें।

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