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पंजाब में डॉक्टरों की हड़ताल, मरीजों को हो रही परेशानी

Updated: Tue, 25 Aug 2026 03:58 PM (IST)

बठिंडा में आम आदमी क्लीनिकों के डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल असिस्टेंटों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

बठिंडा में 53 आम आदमी क्लीनिक बंद (फाइल फोटो)

बठिंडा में 53 आम आदमी क्लीनिक बंद (फाइल फोटो)


HighLights

  1. बठिंडा के 53 आम आदमी क्लीनिक अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बंद

  2. हजारों मरीज प्रभावित, सिविल अस्पतालों पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

  3. कर्मचारी वेतन वृद्धि, नौकरी सुरक्षा सहित अन्य मांगों पर अड़े

जागरण संवाददाता, बठिंडा। अपनी लंबित मांगों को लेकर आम आदमी क्लीनिकों में तैनात डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल असिस्टेंटों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला।

हड़ताल के पहले ही दिन बठिंडा जिले के सभी 53 आम आदमी क्लीनिक पूरी तरह बंद रहे, जिससे हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, मरीजों का दबाव बढ़ने से सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और उपमंडल अस्पतालों (एसडीएच) में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया।

सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

मंगलवार सुबह जिले के विभिन्न आम आदमी क्लीनिकों में कार्यरत कर्मचारी सिविल अस्पताल बठिंडा परिसर में एकत्र हुए और सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर रोष धरना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।

हड़ताल के कारण आम आदमी क्लीनिकों में रोजाना इलाज और दवाएं लेने आने वाले मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीज सुबह निर्धारित समय पर क्लीनिक पहुंचे, लेकिन केंद्र बंद मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।

सरकारी अस्पतालों में बढ़ सकता है दबाव

वहीं, बड़ी संख्या में मरीजों को दवा लेने और जांच करवाने के लिए सिविल अस्पताल, सीएचसी और एसडीएच का रुख करना पड़ा। इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है, तो सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव और बढ़ सकता है।

दरअसल, आम आदमी क्लीनिक शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में मरीजों को उनके घरों के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त दवाएं और आवश्यक जांच सुविधाएं मिलने लगी थीं। इससे सिविल अस्पतालों पर मरीजों का भार कम हुआ था। अब क्लीनिक बंद होने से मरीजों को दोबारा अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।

सरकार के साथ हुईं कई दौर की बैठकें

धरने को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं और हर बार मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी आश्वासन को लागू करने के लिए लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से मांगें लंबित पड़ी हैं, जिसके कारण उन्हें संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

यूनियन नेताओं ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में वेतन और इंसेंटिव में वार्षिक वृद्धि, कैजुअल एवं मेडिकल अवकाश की सुविधा, नौकरी की सुरक्षा, सेवा शर्तों में सुधार तथा कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करना शामिल है।

मांगों को नहीं कर सकते नजरअंदाज

उनका कहना है कि आम आदमी क्लीनिकों की सफलता में डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल असिस्टेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी कई बार मुलाकात कर मांगों को उठाया जा चुका है। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि केवल मौखिक आश्वासनों से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

जब तक सरकार उनकी मांगों को लेकर लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। यूनियन नेताओं ने बताया कि बठिंडा ही नहीं, बल्कि पंजाब के विभिन्न जिलों में भी सिविल सर्जन कार्यालयों के बाहर इसी तरह के धरने दिए जा रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

उधर, हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़े असर को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।

लोगों का कहना है कि आम आदमी क्लीनिकों के बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को हो रही है, जो रोजमर्रा की दवाओं और प्राथमिक उपचार के लिए इन केंद्रों पर निर्भर हैं।