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पराली प्रदूषण पर वेदांता का प्रहार, बठिंडा में प्लांट की बायोमास पहल से 87% घटी पराली जलने की घटनाएं

Published: Wed, 12 Aug 2026 02:15 PM (IST)

वेदांता पावर लिमिटेड ने विश्व जैवईंधन दिवस पर मानसा के तलवंडी साबो प्लांट में धान की पराली को बायोमास के रूप में उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया है।

बठिंडा में प्लांट की बायोमास पहल से 87% घटी पराली जलने की घटनाएं (फाइल फोटो)

बठिंडा में प्लांट की बायोमास पहल से 87% घटी पराली जलने की घटनाएं (फाइल फोटो)

संवाद सहयोगी, मानसा। विश्व जैवईंधन दिवस के अवसर पर वेदांता पावर लिमिटेड ने मानसा जिले में स्थित तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट में कृषि अवशेषों के बायोमास के रूप में उपयोग को बढ़ावा देने की अपनी पहल को रेखांकित किया है।

1,980 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट में धान की पराली समेत कृषि अवशेषों की को-फायरिंग के माध्यम से पराली प्रबंधन को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्लांट में करीब 3.61 लाख मीट्रिक टन बायोमास की को-फायरिंग की गई, जो कुल ईंधन उपयोग का लगभग 5.21 प्रतिशत है।

कंपनी के अनुसार, इससे धान की पराली के लिए वैकल्पिक उपयोग का मार्ग तैयार हुआ है। इसके साथ ही पराली के संग्रह, बेलिंग, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़ी बायोमास आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिला है।

पराली जलाने का विकल्प

कृषि अवशेषों की मांग पैदा होने से किसानों के लिए पराली को खेत में जलाने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन के रूप में उपलब्ध कराने का विकल्प बढ़ा है। कंपनी के अनुसार, वर्ष 2025 के फसल कटाई सीजन में दर्ज पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2023 की तुलना में करीब 87 प्रतिशत कमी आई।

100 से अधिक गांवों में खेतों में आग लगाने की कोई घटना दर्ज नहीं हुई, जबकि 28 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि को आग से बचाया गया। गांव रायपुर के किसान अवतार सिंह ने बताया कि वह अपनी धान की पूरी पराली बायोमास निर्माण संयंत्र को दे रहे हैं।

खेतों में पराली जलाने के बजाय इसे बायोमास पेलेट्स में परिवर्तित कर थर्मल पावर प्लांट में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पराली के निपटारे के साथ ऊर्जा उत्पादन में भी इसका उपयोग हो रहा है।

कंपनी की कुल ताप विद्युत क्षमता 4,780 मेगावाट

वेदांता पावर लिमिटेड के अनुसार, कंपनी की देशभर में कुल ताप विद्युत क्षमता 4,780 मेगावाट है। कंपनी विभिन्न डिस्कॉम को बिजली की आपूर्ति करती है। तलवंडी साबो प्लांट में बायोमास की को-फायरिंग को कृषि अवशेष प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के बीच एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

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