सावधान! पेट की चर्बी बना रही पंजाबियों को बीमार, हर दो में से एक व्यक्ति मोटापे का शिकार; पहले नंबर पर है ये राज्य
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब की 57.2% आबादी पेट की चर्बी से जूझ रही है, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह राष्ट्रीय ...और पढ़ें

पंजाब में 57.2% आबादी पेट की चर्बी से पीड़ित (फाइल फोटो)
HighLights
पंजाब में 57.2% आबादी पेट की चर्बी से पीड़ित
देश में केरल के बाद पंजाब दूसरे स्थान पर
खराब जीवनशैली, खान-पान मोटापे के मुख्य कारण
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब के लोग तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 57.2 प्रतिशत आबादी एब्डामिनल ओबेसिटी यानी पेट की चर्बी से जूझ रही है।
आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समस्या के मामले में पंजाब दूसरे स्थान पर है। पहले नंबर पर केरल है, जहां 58.2 प्रतिशत लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। 56.9 प्रतिशत आबादी के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि पंजाब का यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 39.5 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है, जो राज्य के लिए बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर संकट से बचने के लिए केवल सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं, लोगों को भी अपनी जीवनशैली बदलनी होगी।। समय रहते अगर इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में पंजाब समेत दूसरे राज्यों को मोटापे से जुड़ीं बीमारियों से जूझना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट की चर्बी बढ़ना केवल एक शारीरिक बनावट का मुद्दा नहीं, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गैर-संचारी बीमारियों की खामोश शुरुआत है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की इंडिया डायबिटीज स्टडी पर आधारित हैं, जो 2008 से 2020 के बीच देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई थी।
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भारतीय मानकों के अनुसार, पुरुषों में 90 सेंटीमीटर और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से अधिक कमर का घेरा एब्डामिनल ओबेसिटी माना जाता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में सामान्य मोटापे की दर 28.6 प्रतिशत है, जबकि पेट की चर्बी से प्रभावित आबादी 39.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शहरीकरण, बैठकर काम करने की आदत, फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थ और नींद की कमी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
असंतुलिस खान-पान बड़ा कारण
डाक्टरों का कहना है की मोटापे को अब कॉस्मेटिक प्रॉब्लम समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। ओबेसिटी एक बीमारी है, जो डायबिटीज, घुटनों की परेशानी, स्लीप एपनिया और हृदय रोग जैसी कई गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। खासतौर पर पेट की चर्बी शरीर के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह सीधे मेटाबालिज्म और हार्ट पर असर डालती है। इसके अलावा तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खान-पान इसकी सबसे बड़ी वजह हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लाइफस्टाइल अप्रोच अपनाई जा रही है। इसके तहत पोषण, व्यायाम और जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) की ईट राइट मूवमेंट भी लोगों को कम नमक, कम चीनी और कम फैट वाला भोजन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।