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PU में एबीवीपी ने लहराया भगवा, युवाओं का भांपा मूड; पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नए संकेत

Published: Tue, 01 Sep 2026 07:05 AM (IST)Updated: Tue, 01 Sep 2026 01:48 PM (IST)

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर भगवा लहराया। इससे 2027 के विधानसभा ...और पढ़ें

पीयू में प्रधान पद पर जीत के बाद भगवा लहराते एबीवीपी के अंकित बिढा़न। फोटो : उपेंद्र सेन गुप्ता

पीयू में प्रधान पद पर जीत के बाद भगवा लहराते एबीवीपी के अंकित बिढा़न। फोटो : उपेंद्र सेन गुप्ता

HighLights

  1. छात्र संघ चुनाव का पंजाब की राजनीति पर पड़ता है सीधा असर।-

  2. युवाओं ने 2027 के विधान सभा चुनाव को लेकर दिए संकेत।

  3. आप और कांग्रेस की छात्र इकाइयों को मिली हार।

कैलाश नाथ, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद जीत का परचम लहराया है।

चुनाव भले ही छात्र संघ के हो लेकिन भाजपा ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्योंकि छात्र संघ चुनाव से पंजाब के युवा मतदाताओं के मूड का अंदाजा लगाया जा रहा है। यूनिवर्सिटी में करीब 65 फीसदी छात्र पंजाब के विभिन्न जिलों व विभिन्न वर्गों से जुड़े हुए हैं।

एबीवीपी के अंकित बिढान ने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी आप के छात्र संघ एएसएपी (एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फार अल्टरनेटिव पालिटिक्स) के आदिल बराड़ को 512 वोटों से हराया। अंकित को 3149 तो आदिल को 2637 वोट मिले। जबकि एनएसयूआई के प्रत्याशी गुरमन सिद्धू को 2263 वोट मिले।

वाइस प्रेसिडंट पर पीयूडीफ (पंजाब यूनिवर्सिटी डेमोक्रेटिक फ्रंट) के अमन सिंह जबकि जनरल सेक्रेटरी पर निर्दलीय ध्यान सिंह और ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर निर्दलीय विशाल बामल ने जीत दर्ज की। इस छात्र संघ चुनाव में दो बातें रोचक रहीं।

पहली, मतदान से ठीक एक दिन पहले 31 अगस्त को एबीवीपी को शिरोमणि अकाली दल की इकाई सोई ने समर्थन दिया। यह इसलिए अहम है क्योंकि पंजाब में अब तक भाजपा अपने दम पर 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। और शिअद भी गठबंधन को लेकर कुछ भी खुलकर नहीं बोल रही है।

लेकिन, हाल ही में शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात काफी चर्चा का विषय रही है। विपक्षी दलों को भी अंदेशा है कि इस बार विस चुनाव से पहले दोनों पार्टियों का फिर से गठबंधन हो सकता है। ऐसे में छात्र संघ चुनाव में दोनों पार्टियों का एक साथ आना इसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरा, छात्र चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेय को खासी उम्मीदें थीं। इसका सबसे बड़ा कारण हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी आंदोलन था। यही कारण है कि आप ने अपने सबसे युवा सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर को चुनाव की कमान सौंप रखी थी।

पार्टी ने छात्र चुनाव में पूरी ताकत झोंकी हुई थी। लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। और तो और पार्टी दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस को भी इस चुनाव में झटका लगा। क्योंकि उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रत्याशी गुरमन सिंह सिद्धू तीसरे नंबर पर रहे। चुनाव की बात करें तो पार्टी तीसरे नंबर पर रही। और कोई सीट नहीं जीत सकी।

 

पंजाब कांग्रेस की खींचतान का दिखा असर

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच चल रही खींचतान का असर भी छात्र संघ चुनाव में देखने को मिला। आंतरिक गुटबाजी में उलझे होने के कारण छात्र राजनीति में दखल रखने वाले नेता सक्रिय नहीं हुए।

जााखड़ ने लिखा-दलाव की हवा का झोंका

वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने एबीवीपी की जीत पर अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- बदलाव की हवा का झोंका पंजाब यूनिवर्सिटी से शुरू हो गया है। एबीवीपी ने छात्र संघ चुनाव में लगातार दूसरी जीत हासिल करके इतिहास रच दिया है।

जंतर-मंतर पर जेन-जी के प्रदर्शन का नहीं दिखा असर

नीट परीक्षा लीक होने के बाद दिल्ली में के जंतर-मंतर पर जिस प्रकार से जेन-जी ने प्रदर्शन किया उसे देखते हुए यह सबको उम्मीद थी कि पीयू चुनाव में उसका असर देखने को मिलेगा।

हालांकि चुनाव परिणाम ने सारे कयासों को गलत साबित कर दिया। वहीं, जीत के बाद अंकित बिढान ने जीत को जेन-जी को समर्पित करते हुए कहा, यह जीत मेरे अकेले की नहीं है। यह जेन-जी की जीत है। जेन-जी का भरोसा प्रधानमंत्री मोदी पर है।