विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पंजाब चुनाव से पहले भाजपा में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल, कैप्टन अमरिंदर ने PM मोदी से मांगी स्पष्टता

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:17 AM (IST)

पंजाब चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 'दिमागी नक्सल' शब्द पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी से स्पष्टीकरण मांगा है।

पंजाब चुनाव से पहले भाजपा में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल (फाइल फोटो)

पंजाब चुनाव से पहले भाजपा में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल (फाइल फोटो)


HighLights

  1. कैप्टन अमरिंदर ने 'दिमागी नक्सल' शब्द पर सवाल उठाया

  2. पीएम मोदी से इसकी स्पष्ट परिभाषा मांगी गई

  3. लोकतांत्रिक असहमति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर दिया

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सवाल उठाकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से स्पष्ट करने को कहा है कि ‘दिमागी नक्सल’ का मतलब क्या है और इस श्रेणी को लोकतांत्रिक तरीके से जताई जाने वाली वैध असहमति से किस तरह अलग किया जाएगा।

पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच कैप्टन अमरिंदर की यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि भाजपा राज्य में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दैनिक इंग्लिश समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने लेख में प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए संबोधन के संदर्भ में यह बात कही। उन्होंने लिखा, ‘‘आइए, नक्सल शब्द को लेकर बहुत सहज न हों।’’ उन्होंने कहा कि भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में से किसी एक को चुनने की स्थिति में नहीं होना चाहिए। दोनों को सही तरीके से समझा जाए तो वे एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

पंजाब में राजनीतिक विस्तार की कोशिश में भाजपा

पंजाब में भाजपा इस बार विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर रही है। पार्टी राज्य में अपने दम पर राजनीतिक विस्तार की कोशिश कर रही है और विभिन्न वर्गों के बीच अपना आधार बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे समय में कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से प्रधानमंत्री के संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ लोकतांत्रिक स्वतंत्रता भी जरूरी

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन वैध लोकतांत्रिक असहमति को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ की पहचान के लिए कौन-सा आधार तय किया गया है। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि इस शब्द के दायरे में कौन आता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को इससे कैसे अलग किया जाएगा।

चुनाव से पहले भाजपा के लिए संवेदनशील मुद्दा

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। राज्य में राजनीतिक दल किसानों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के मुद्दों को लेकर चुनावी जमीन तैयार कर रहे हैं।

ऐसे में भाजपा के वरिष्ठ नेता की यह टिप्पणी पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस को और धार दे सकती है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने लेख के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।